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क्यों बेटे की जान जोखिम में डाल रहा है यह आदमी?
स्वामी सत्यभक्त
Updated Fri, 31 Oct 2014 10:22 AM IST
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उत्तरी अमेरिका में नियाग्रा नामक एक प्रपात है। इसमें पानी की बहुत चौड़ी धार करीब पचास मीटर ऊंचाई से गिरती है। कुछ वर्ष पहले की बात है। जान मैकेंजी नामक एक व्यक्ति ने घोषणा की कि वह एक तार पर चलकर नियाग्रा प्रपात पार करेगा। प्रपात के एक किनारे से दूसरे किनारे तक एक तार फैलाया गया। इस कौशल को देखने को बहुत भीड़ इकट्ठी हुई। ईश्वर का नाम लेकर मैकेंजी ने तार पर चलना प्रारंभ किया।
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भीड़ की आंखें मैकेंजी की ओर लगी थीं। वह धीरे-धीरे चलकर उस पार पहुंच गए। ज्योंही वह उस पार पहुंचे, भीड़ उनकी प्रशंसा में चिल्ला उठी। तालियों की गड़गड़ाहट और तारीफों के स्वरों के बीच उन्होंने लोगों से पूछा, क्या मैं फिर इस पार से उस पार तक इसी प्रकार पार कर सकता हूं?
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लोगों ने कहा 'हां', तो उन्होंने फिर पूछा, आप लोगों में से कोई मेरे कंधे पर बैठकर प्रपात को पार करने के लिए राजी है? इस प्रश्न पर भीड़ में सन्नाटा छा गया। कोई भी उनके कंधे पर बैठकर प्रपात पार करने को तैयार नहीं हुआ। फिर उन्होंने अपने सोलह वर्षीय इकलौते बेटे को कंधे पर बैठने को कहा। पुत्र पिता के कहने पर कंधे पर बैठ गया।
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पिता ने धीरे-धीरे तार पर चलना प्रारंभ किया। भीड़ की आंखें उनकी ओर लगी हुई थीं। कोई कहता था, अभी दोनों गिरे, तो कोई कहता, अब मरे। मगर मैकेंजी अपने पुत्र सहित सरलता से प्रपात पार कर गए।
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भीड़ ने इस बार पहले से अधिक उनकी प्रशंसा की और इनाम भी दिए। इस सम्मान का उन्होंने उत्तर भी दिया और कहा, आप लोगों को मुझ पर विश्वास नहीं था, इसलिए कोई मेरे कंधे पर बैठने को तैयार नहीं हुआ। लेकिन मेरे पुत्र को विश्वास था। ईश्वर हम सबका पिता है। हम उस पर विश्वास करें, तो तमाम कठिनाइयों से पार हो सकते हैं।