{"_id":"9730cdce17b84087e73d39648fb29adf","slug":"don-t-kill-your-heart","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुःख से मुक्ति पाने के लिए श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह मंत्र दिया","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
दुःख से मुक्ति पाने के लिए श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह मंत्र दिया
शिवकुमार गोयल
Updated Thu, 27 Mar 2014 09:12 AM IST
विज्ञापन
हमारे सभी शुभ-अशुभ कर्मों का कारण मन है। उपनिषद में कहा गया है, मन एव मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयोः। अर्थात मन के परिष्कृत हो जाने से या उसमें सत्य को प्रतिष्ठित करने से स्वतः दया, करुणा, उदारता, सेवा, परोपकार जैसे सद्गुणों का समावेश हो जाता है।
विज्ञापन
भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए कहते हैं, जिसका मन वश में है, राग-द्वेष से रहित है, वह स्थायी प्रसन्नता प्राप्त करता है। उस प्रसन्नता से वह संपूर्ण दुखों से मुक्ति पा लेता है। जो पुरुष मन को संयमित कर लेने में सफल हो जाता है, वह कर्मयोगी और संन्यासी ही समझने के योग्य है।
विज्ञापन
भगवान बुद्ध अपने प्रिय शिष्य आनंद की जिज्ञासा का समाधान करते हुए कहते हैं, अपने मन पर विजय पा लेना या अपने अंतःकरण को किसी भी तरह की लालसा से मुक्त कर लेना और भोग को भोगते हुए समय आने पर उसे छोड़ देने की सामर्थ्य अपने भीतर उत्पन्न कर लेना ही वास्तविक मोक्ष है।
विज्ञापन
मन को मारने से इच्छाएं नहीं मरतीं, इसलिए मन को मारने की नहीं, साधने की जरूरत है। मन कभी खाली नहीं रह सकता। अतः उसे नकारात्मक विचारों से मुक्त रखकर हमेशा सकारात्मक विचारों का ही मंथन करते रहना चाहिए।
संतों ने भी मन में गलत धारणा पनपने को 'मानसिक पाप कर्म' बताया है, इसलिए मन को हमेशा परमात्मा में लगाना चाहिए और सदा सत्कर्मों की ओर उन्मुख रहना चाहिए।