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अगर ऐसे प्यार करें तो जीवन में सिर्फ प्यार ही प्यार होगा
शिवकुमार गोयल
Updated Sat, 01 Feb 2014 03:34 PM IST
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धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि प्रत्येक प्राणी में परमात्मा के दर्शन करनेवाला और प्रत्येक जीव से प्रेम करनेवाला सच्चा ब्रह्मज्ञानी होता है। एक दिन ब्रह्मनिष्ठ संत उड़िया बाबा गंगा तट पर श्रद्धालुओं को उपदेश दे रहे थे। उन्होंने अचानक दोनों हाथों से गंगा की बालुका (रेती) उठाई और पास बैठे भक्तों को संबोधित करते हुए कहा, जब तक यह बालुका साक्षात ब्रह्म न मालूम पड़े, तब तक यह समझना चाहिए कि अभी ब्रह्मज्ञान अधूरा है। ब्रह्म बोध होने पर तो ब्रह्म से पृथक कुछ दिखाई ही नहीं देगा।
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उन्होंने आगे कहा, ब्रह्मज्ञानी को तो यह लगने लगता है कि जो कुछ दिख रहा है, सब सच्चिदानंद ब्रह्म ही है। सच्चा ब्रह्मज्ञानी किसी से राग-द्वेष की, उसे दुखी देखने की कल्पना भी कैसे कर सकता है!
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महान भगवताचार्य स्वामी अखंडानंद सरस्वती भी प्राणी मात्र में भगवान के दर्शन कर सभी से प्रेम करने की प्रेरणा दिया करते थे। एक दिन स्वामी प्रबुद्धानंद जी उनसे पूछ लिया, आप विद्वानों के साथ-साथ मूर्खों व नास्तिकों को भी प्यार करते हैं- ऐसा भला कैसे संभव है?
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स्वामी जी ने कहा, मुझे ऐसा कभी नहीं लगता कि इस देह के भीतर मैं हूं और बाहर कोई अन्य। लगता है, सब अपना है, इसलिए मैं सभी से विनयशीलता का व्यवहार करता हूं। स्वामी जी हमेशा यह कहा करते थे कि कभी किसी का तिरस्कार नहीं करना चाहिए।