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इस कारण से गणिका ने दयानंद सरस्वती को जहर देकर मरवा दिया
स्वामी सत्यभक्त
Updated Tue, 17 Feb 2015 01:07 PM IST
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जोधपुर के महाराज यशवंत सिंह ने स्वामी दयानंद सरस्वती को आमंत्रित किया। स्वामीजी वहां गए। निर्भीक और स्पष्टवादी होने के खतरों से उनके कुछ शुभचिंतकों ने आगाह भी किया। प्रसिद्ध है कि बचपन में महाशिवरात्रि पूजा के समय एक साधारण घटना का तार्किक विवेचन उनके मन में धर्म और अध्यात्म की सेवा के लिए प्रेरित कर गया था।
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और उन्होंने अपने विचारों और सुधार कार्यों से नए जागरण की लहर उत्पन्न कर दी थी। इस अभियान में कई पुरातनपंथी और निहितस्वार्थी लोग उनके विरोधी भी बन गए थे। जोधपुर उनके लिए नई जगह थी। और उनके शुभचिंतकों ने नई जगह जाने के लिए इसी कारण रोकना चाहा था। लेकिन स्वामीजी मे कहा कि फिर तो जाना और भी जरूरी है।
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स्वामी दयानंद जोधपुर गए और एक दिन वहां के दरबार में महाराज की वेश्या नन्हींजान को समीप देखकर उसकी कड़ी आलोचना कर दी। नन्हींजान आलोचना सुन कर स्वामीजी की दुश्मन बन गई। उसने अन्य विरोधियों से मिलकर स्वामीजी के रसोइए जगन्नाथ को बहकाया।
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उसने दूध में विष मिलाकर स्वामी जी को पिला दिया। स्वामीजी पर उसका तुरंत असर दिखाई दिया। उनके पेट में भयंकर कष्ट होने लगा। स्वामी जी ने वमन-विरेचन की योग क्रियाओं से दूषित पदार्थ को निकाल देने की चेष्टा की, पर विष तीव्र था और अपना काम कर चुका था।
कुछ दिन बाद ही स्वामीजी की मृत्यु हो गई। इस घटना का एक अन्य और महत्वपूर्ण प्रसंग है कि जगन्नाथ द्वारा दूध में जहर देने की बात स्वामीजी को थोड़ी देर बाद ही पता चल गई थी। उन्होंने समय पाकर उसे अपने पास बुलाया। उनके आत्मिक प्रभाव से जगन्नाथ कांप गया और अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
पर स्वामीजी ने उसे कुछ रुपये देकर कहा, 'अब जहां तक बन पडे़ शीघ्र से शीघ्र तुम जोधपुर की सरहद से बाहर निकल जाओ, क्योंकि यदि किसी भी प्रकार इसकी खबर महाराज को लग गई तो तुमको बिना फांसी पर चढ़ाए न मानेंगे।' बस जगन्नाथ उसी क्षण वहां से निकल गया।