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हर इंसान के दुख का कारण बस यह एक चीज है, यकीनन आपकी भी होगी
मेल गिब्सन
Updated Tue, 02 Feb 2016 01:48 PM IST
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एक दिन मनुष्य गहरी निराशा में अकेला बैठा था। तब धरती के सभी जीव-जंतु उसके निकट आए और उससे बोले, तुम्हें इस प्रकार दुखी देखकर हमें अच्छा नहीं लग रहा। तुम्हें हमसे जो कुछ भी चाहिए, तुम निःसंकोच मांग लो और हम तुम्हें वह देंगे।
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मनुष्य ने कहा, मैं चाहता हूं कि मेरी दृष्टि पैनी हो जाए। इस पर गिद्ध ने उत्तर दिया कि मैं तुम्हें अपनी दृष्टि देता हूं। मनुष्य को इतने से संतोष नहीं हुआ। उसने कहा, मैं शक्तिशाली बनना चाहता हूं। जगुआर ने कहा, मैं अपनी शक्ति देता हूं, तुम मेरे जैसे शक्तिशाली बनोगे।
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मनुष्य ने फिर कहा, मैं पृथ्वी के रहस्यों को जानना चाहता हूं। सर्प भी वहीं था। उसने कहा, मैं तुम्हें उनके बारे में बताऊंगा।
इस प्रकार अन्य जीव-जंतुओं ने भी मनुष्य को अपनी खूबियां और विलक्षणताएं सौंप दीं। जब मनुष्य को उनसे सब कुछ मिल गया, तो वह अपने रास्ते चला गया। जीव-जंतुओं के समूह में उपस्थित उल्लू ने सभी से कहा, अब जबकि मनुष्य इस पृथ्वी के बारे में इतना कुछ जान गया है, वह बहुत सारे काम करने में सक्षम होगा। इस विचार से मैं भयभीत हूं।
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हिरण ने कहा, मनुष्य को जो कुछ भी चाहिए था, वह उसे मिल गया! अब वह कभी उदास नहीं होगा। इस पर उल्लू ने उत्तर दिया, नहीं, मैंने मनुष्य के भीतर एक गहरा गड्ढा देखा है। उसके कारण मनुष्य के भीतर नित-नई इच्छाएं जन्म लेती रहेंगी।
उन्हें कोई पूरा नहीं कर सकेगा। एक इच्छा पूरी होने के बाद वह फिर से उदास होगा, और नई इच्छाएं करने लगेगा। वह सबसे कुछ-न-कुछ लेता जाएगा। और एक दिन यह पृथ्वी ही कह देगी, मैं अब पूरी रिक्त हो चुकी हूं। मेरे पास तुम्हें देने के लिए कुछ नहीं है।