{"_id":"8c275e51fa2e20965aeecaf056d41707","slug":"always-stay-calm-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुंदर कन्या की हत्या कोई इसलिए भी करे, आप सोच नहीं सकते","category":{"title":"Metaphysical","title_hn":"परामनोविज्ञान","slug":"metaphysical-parasychology"}}
सुंदर कन्या की हत्या कोई इसलिए भी करे, आप सोच नहीं सकते
तिष्यरक्षित
Updated Tue, 31 Mar 2015 09:27 AM IST
विज्ञापन
गरीब ब्राह्मण सोममित्र कुटिया के आंगन में अपनी पांच वर्ष की लड़की सुंदरी को गोद में लिए बैठा है। पत्नी तीन दिन तक प्रसव पीड़ा से छटपटाती रही है। तीसरे दिन एक बच्ची को जन्म देकर उसने शरीर छोड़ दिया। वह कन्या सोममित्र के पास ही बड़ी हुई। बड़ी लड़की की शादी कर ब्राह्मण सुंदरी को लेकर गौतम के संघ में दीक्षित हो गया।
विज्ञापन
बौद्ध भिक्षुओं को देखकर सुंदरी को अच्छा लगता था। एक दिन उसने पिता से कहा कि मैं भी भिक्षुणी होना चाहती हूं। पिता ने कुछ नहीं कहा। उनके मौन को अनुमति समझ कर एक दिन सुंदरी भगवान के शिविर में गई और भिक्षुणी बन गई। धीरे-धीरे समय गुजरता चला गया। सुंदरी ध्यान में अच्छी गति पाने लगी। इसके साथ-साथ भगवान का प्रभाव भी दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा था।
विज्ञापन
पढ़ें, यह है भगवान राम के जन्म और विवाह की असली तिथि
सुंदरी के प्रभाव और ध्यान में गति देखकर कुछ कुटिल जनों ने सुंदरी को मरवा डाला, और उसकी लाश जैतवन में ही छिपा दी। सुंदरी की हत्या के बाद उन लोगों ने नगर में अपवाद फैला दिया और राजा प्रसेनजित को भी शिकायत की। प्रसेनजित भगवान का अनन्य भक्त था।
विज्ञापन
फिर भी उन्होंने सैनिक भेजे और जैतवन में सुंदरी की लाश मिली। लेकिन भगवान उसी तरह गंध कुटी में सत्संग करते रहे। वह कहते, तुम शांत रहो और इस घटना को भी ध्यान का अंग बना लो। एक न एक दिन सत्य सामने आएगा। और फिर ऐसा ही हुआ। जिन वधिकों ने सुंदरी को मारा था, वे एक दिन मधुशाला में सच्चाई उगल गए।
पढ़ें,साप्ताहिक राशिफलः अप्रैल का पहला हफ्ता इनके लिए लकी है
उस आधार पर अधिकारियों ने जांच की और असल अपराधी निंदित हुए। राज्य ने उन्हें कठोर दंड दिया। असत्य का आवरण हटते ही भगवान की कीर्ति हजार गुना बढ़ गई।