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Mahabharat Ke Shrap: महाभारत के इन श्रापों ने बदल कर रख दिया पूरा इतिहास, वासुदेव कृष्ण भी नहीं रहे अछूते

Tue, 01 Apr 2025 10:31 AM IST
दीक्षा पाठक धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीक्षा पाठक Updated Tue, 01 Apr 2025 10:31 AM IST
सार

Mahabharata story: आज की इस खबर में हम आपको महाभारत काल के कुछ प्रमुख श्रापों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने महाभारत के इतिहास को नया मोड़ दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं।

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Mahabharat Ke Shrap These curses of Mahabharat changed the whole history Krishna was not untouched
महाभारत युद्ध में मिले थे ये श्राप - फोटो : freepik.com

विस्तार

महाभारत आज के लोगों के लिए दिशा दिखाने वाले महाकाव्य से कम नहीं है। यह एक ऐसा महाकाव्य है, जिसमें कर्म, भाग्य और श्रापों की अहम भूमिका रही है। इस युद्ध में जितने वरदानों की मान्यता है, इससे कहीं ज्यादा श्रापों का भी जिक्र रहा है। इस युद्ध को वरदान से ज्यादा श्रापों ने ही प्रभावित किया है, जिसने न केवल काल चक्र को प्रभावित किया था, बल्कि पूरे युद्ध को ही बदल कर रख दिया था। तो आज की इस खबर में हम आपको महाभारत काल के कुछ प्रमुख श्रापों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने महाभारत के इतिहास को नया मोड़ दिया है। आइए विस्तार से जानते हैं।
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1. जब परशुराम ने कर्ण को दिया था श्राप
कर्ण का नाम महाभारत के वीर योद्धाओं की श्रेणी में हमेशा से शुमार रहा है। वह न केवल बड़े दानवीर थे, बल्कि एक  कुशल योद्धा भी थे। महाभारत के युद्ध में कर्ण को हराने के लिए स्वयं वासुदेव कृष्ण को भी छल करना पड़ा था। हालांकि, इन सबसे पहले भी कर्ण को आजीवन संघर्ष ही करना पड़ा था। कर्ण ने गुरु परशुराम से शस्त्र विद्या सीखी। लेकिन जब परशुराम को पता चला कि कर्ण क्षत्रिय कुल में जन्मे थे और उन्होंने अपनी जाति छिपाई थी तो उन्होंने कर्ण को यह श्राप दिया कि जब भी उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता होगी, वे अपनी सीखी हुई विद्या भूल जाएंगे।  कुरुक्षेत्र युद्ध में अर्जुन के सामने वह अपने दिव्यास्त्रों का प्रयोग नहीं कर पाए थे।
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2. गांधारी ने श्रीकृष्ण को दिया था यह श्राप
महाभारत के युद्ध में गांधारी के सौ पुत्रों की मृत्यु हो गई थी और उनके कुल का दीपक बुझ गया था। अपने पुत्रों की मृत्यु से आहत गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया कि जैसे उनके वंश का नाश हुआ है, वैसे ही यादव कुल का भी नाश होगा। इस श्राप के कारण ही आगे चलकर यादवों में गृहयुद्ध हुआ और पूरा वंश नष्ट हो गया। स्वयं श्रीकृष्ण भी एक शिकारी के तीर का शिकार बने और उन्होंने अपनी देह त्याग दी।
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3. युधिष्ठिर की अधूरी सच्चाई के चलते मिला नरक के दर्शन का श्राप

महाभारत में कुरुक्षेत्र युद्ध में योद्धाओं से साम, दाम, दंड, भेद सभी को आजमाया था। ऐसे में योद्धाओं को परास्त करने के लिए उन्होंने छल-कपट और झूठ का भी सहारा लिया था। युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य को मारने के लिए युधिष्ठिर ने एक अधूरी सच्चाई बोली कि "अश्वत्थामा मारा गया" (फिर धीरे से कहा, "परंतु हाथी")। इस छल को अधर्म माना गया, और इसके परिणामस्वरूप युधिष्ठिर को अपने जीवन के अंतिम समय में नरक के दर्शन करने पड़े।

4. भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान बना श्राप
भीष्म पितामह हमेशा से ही धर्म के रास्ते चले। अपने पिता शांतनु को प्रसन्न करने के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया और इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त किया। हालांकि, अपनी कुल वधू द्रौपदी के चीर हरण के वक्त भी वह शांत थे और युद्ध में कौरवों का साथ देने के लिए मजबूर थे, जबकि उनका मन पांडवों के साथ था। आखिर में जब वह युद्ध में बुरी तरह घायल हो गए तो कई महीनों तक शरशैया पर पड़े रहे और जब तक सूर्य उत्तरायण नहीं हुआ। ऐसे में उनका यही वरदान, उनके लिए श्राप साबित हो गया था।


5. द्रौपदी ने अपने अपमान पर जब कौरवों को दिया था यह श्राप
  सभा में जब कौरवों ने कुलवधू द्रोपदी का चीर-हरण किया और भरी सभा में उनको बाल सहित घसीट कर अपमान किया, तो उन्होंने क्रोधित होकर श्राप दिया कि उनके कुल का सर्वनाश होगा। हालांकि, आगे चलकर उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई, क्योंकि महाभारत युद्ध में समस्त कौरव मारे गए और उनका वंश समाप्त हो गया।





डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 
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