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विजयादशमी पर शमी पूजा: दशहरा पर शमी पूजन का क्या है महत्व, जानें इसके पीछे की पौराणिक कथा
Mon, 19 Oct 2026 06:29 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 19 Oct 2026 06:29 PM IST
सार
दशहरे पर शमी पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयादशमी पर शमी पूजन करने से शत्रुओं पर विजय हासिल होती है।
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दशहरे पर शमी पूजा का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
विजयादशमी यानी दशहरे पर भगवान श्रीराम की पूजा, शस्त्र पूजन और रावण दहन के साथ शमी वृक्ष की पूजा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। भारतीय परंपरा में शमी को शुभता, विजय और मंगल का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि दशहरे के दिन शमी पूजन करने से जीवन में आने वाली बाधाओं पर विजय प्राप्त करने का संकल्प मजबूत होता है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। शमी पूजन का संबंध महाभारत में वर्णित पांडवों के अज्ञातवास की कथा से भी जोड़ा जाता है।
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पांडवों के अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर रखने की कथा
महाभारत के अनुसार, पांडवों को बारह वर्ष के वनवास के बाद एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था। अज्ञातवास के दौरान यदि उनकी पहचान उजागर हो जाती, तो उन्हें फिर से वनवास भुगतना पड़ सकता था। इसलिए उन्होंने अपने अस्त्र-शस्त्र छिपाकर रखने का निर्णय लिया। लोकप्रिय धार्मिक कथा के अनुसार, अर्जुन ने अपने गांडीव धनुष सहित अन्य अस्त्र-शस्त्र एक शमी वृक्ष पर रख दिए और उन्हें इस तरह छिपाया कि कोई पहचान न सके।
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इसके बाद पांडवों ने विराट नगर में अपना अज्ञातवास बिताया। एक वर्ष पूरा होने पर जब कौरवों से युद्ध की स्थिति बनी, तब अर्जुन ने शमी वृक्ष से अपने अस्त्र-शस्त्र वापस प्राप्त किए और युद्ध के लिए तैयार हुए। इस प्रसंग को शमी वृक्ष की रक्षा, विजय और संकट के समय शक्ति प्राप्त करने के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी लोकप्रचलित मान्यता के कारण दशहरे पर शमी पूजन और शस्त्र पूजन की परंपरा को विशेष महत्व मिला।
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भगवान श्रीराम की विजय से भी जुड़ा है दशहरा
विजयादशमी भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का पर्व है। यह दिन अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का संदेश देता है। शमी पूजन भी इसी विजय भाव से जुड़ा माना जाता है। विशेष रूप से क्षत्रिय परंपराओं में शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा का महत्व रहा है। राजस्थान सहित देश के कई क्षेत्रों में दशहरे पर शमी के दर्शन, पूजन और उसकी पत्तियों को शुभ मानकर बांटने की परंपरा प्रचलित है।
कैसे करें शमी वृक्ष का पूजन?
दशहरे के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शमी वृक्ष के पास जाकर श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें। वृक्ष की जड़ों में स्वच्छ जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और पुष्प चढ़ाएं। इसके बाद परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और कार्यों में सफलता की प्रार्थना करें। वृक्ष को नुकसान पहुंचाए बिना उसकी गिरी हुई पत्तियों को ही प्रतीकात्मक रूप से ग्रहण करना उचित है। यदि घर में शमी का वृक्ष उपलब्ध न हो, तो मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं।
विजयादशमी पर शमी वृक्ष की पूजा करते हुए यही संकल्प लेना चाहिए कि हम सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलेंगे।
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