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Varuthini Ekadashi Vrat 2020: क्यों खास है वैशाख माह की वरुथिनी एकादशी
Wed, 15 Apr 2020 01:51 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 15 Apr 2020 01:51 PM IST
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Varuthini Ekadashi 2020
- फोटो : Varuthini Ekadashi 2020
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Varuthini Ekadashi 2020 Date हिंदू धर्म में एकादशी व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। एकादशी का व्रत दान, पुण्य और उपासना के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। साल में कुल मिलाकर 24 एकादशियां आती हैं। प्रत्येक महीने में दो एकादशी आती हैं। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की तिथि की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। इस पर यह एकादशी 18 अप्रैल को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। आइए जानते हैं वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व...
वरुथिनी एकादशी का महत्व
वरुथिनी एकादशी का व्रत जो व्यक्ति विधि-विधान से पालन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में इस एकादशी को पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। वरूथिनी शब्द संस्कृत के वरुथिन से बना है, जिसका अर्थ होता है कवच, प्रतिरक्षक। शास्त्रों में कहा गया है कि इस एकादशी को व्रत करने भगवान विष्णु उन्हें हर तरह के संकट से उनकी रक्षा करते हैं। इस एकादशी के बारे में कहा गया है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने पर मिलता है, वह मात्र इस पावन वरुथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।
एकादशी व्रत का नियम
वरुथिनी एकादशी व्रत रखने वाले साधक को तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है।
- व्रत वाले दिन साधक को काम, क्रोध आदि पर पूर्ण नियंत्रण रखना होता है।
- साधक को झूठ बोलने और निंदा करने से बचना होता है।
- वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले के लिए किसी भी तरह का नशा करना पूर्णत: वर्जित है।
- इस दिन निद्रा का त्याग करके भगवान विष्णु का जागरण, भजन, कीर्तन एवं मंत्र जप करना चाहिए।
- व्रती को इस दिन भगवान के नाम और उनके अवतारों की कथा और कीर्तन करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज, बैंगन, मांसाहार और मादक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।
कब है वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2020 Date)
वैशाख महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 18 अप्रैल को पड़ रही है।
वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2020 Muhurat)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 अप्रैल को रात्रि 08:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 18 अप्रैल को रात 10:19 बजे तक
वरुथिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 19 अप्रैल को सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 35 मिनट
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वरुथिनी एकादशी का महत्व
वरुथिनी एकादशी का व्रत जो व्यक्ति विधि-विधान से पालन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में इस एकादशी को पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। वरूथिनी शब्द संस्कृत के वरुथिन से बना है, जिसका अर्थ होता है कवच, प्रतिरक्षक। शास्त्रों में कहा गया है कि इस एकादशी को व्रत करने भगवान विष्णु उन्हें हर तरह के संकट से उनकी रक्षा करते हैं। इस एकादशी के बारे में कहा गया है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने पर मिलता है, वह मात्र इस पावन वरुथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।
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एकादशी व्रत का नियम
वरुथिनी एकादशी व्रत रखने वाले साधक को तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है।
- व्रत वाले दिन साधक को काम, क्रोध आदि पर पूर्ण नियंत्रण रखना होता है।
- साधक को झूठ बोलने और निंदा करने से बचना होता है।
- वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले के लिए किसी भी तरह का नशा करना पूर्णत: वर्जित है।
- इस दिन निद्रा का त्याग करके भगवान विष्णु का जागरण, भजन, कीर्तन एवं मंत्र जप करना चाहिए।
- व्रती को इस दिन भगवान के नाम और उनके अवतारों की कथा और कीर्तन करना चाहिए।
- लहसुन, प्याज, बैंगन, मांसाहार और मादक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।
कब है वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2020 Date)
वैशाख महीने में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 18 अप्रैल को पड़ रही है।
वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2020 Muhurat)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 अप्रैल को रात्रि 08:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 18 अप्रैल को रात 10:19 बजे तक
वरुथिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 19 अप्रैल को सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 35 मिनट