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जानिए क्या है विवस्त सप्तमी का पर्व, इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से मनोकामनाएं होती है पूर्ण
Fri, 16 Jul 2021 06:17 AM IST
विनोद शुक्ला
अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 16 Jul 2021 06:17 AM IST
सार
सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने या जल चढ़ाने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने और पूजा करने से रोग दूर होती हैं।
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सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को लंबी आयु, आरोग्य, धन-धान्य में बढ़ोत्तरी, यश-कीर्ति, विद्या, भाग्य और पुत्र, मित्र व पत्नी का सहयोग प्राप्त होता है।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सूर्य पुराण के अनुसार आषाढ़ मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को भगवान सूर्यदेव के वरूण रूप की पूजा करने का विधान है। इस बार ये तिथि 16 जुलाई, शुक्रवार को रहेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति को लंबी आयु, आरोग्य, धन-धान्य में बढ़ोत्तरी, यश-कीर्ति, विद्या, भाग्य और पुत्र, मित्र व पत्नी का सहयोग प्राप्त होता है। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्ची निष्ठा और श्रद्धाभाव से व्रत रखकर भगवान सूर्य की पूजा करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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सूर्य पुत्र वैवस्वत मनु की पूजा
ये दिन सूर्यनारायण के पुत्र वैवस्वत मनु की पूजा का दिन भी है। सूर्यदेव ने देवमाता अदिति के गर्भ से जन्म लिया था और विवस्वान एवं मार्तण्ड कहलाए। इन्हीं की संतान वैवस्वत मनु हुए जिनसे सृष्टि का विकास हुआ है। इन्हीं के नाम पर ये मन्वंतर है। शनि देव, यमराज, यमुना और कर्ण भी भगवान सूर्य की ही संतान हैं। इस दिन उगते हुए सूरज को जल चढ़ाकर विशेष पूजा करनी चाहिए, साथ ही सूर्यदेव के निमित्त व्रत भी रखना चाहिए। इससे बीमारियां दूर होती हैं और सभी जगह विजय,यश एवं कीर्ति मिलती है। भविष्य पुराण में भी भगवान सूर्य को जल चढ़ाने का बहुत महत्व बताया गया है।
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सूर्य पूजा से मिलता है लाभ
सुबह उगते हुए सूर्य को प्रणाम करने या जल चढ़ाने से मन में आत्मविश्वास बढ़ता है एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने और पूजा करने से रोग दूर होती हैं। भविष्य पुराण में श्रीकृष्ण ने अपने पुत्र को सूर्य पूजा का महत्व बताया है। श्रीकृष्ण ने कहा है कि सूर्य ही एक प्रत्यक्ष देवता हैं। यानी ऐसे भगवान हैं जिन्हें रोज देखा जा सकता है।
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सूर्य उपासना से निरोगी जीवन
सूर्य की रोगशमन शक्ति का उल्लेख वेद , पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है। इनमें यह भी लिखा है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है। सूर्य की रोशनी के बिना जगत में कुछ भी संभव नहीं है । पुराणों के अनुसार इस सप्तमी को जो भी सूर्य देव की उपासना तथा व्रत करते है,उनके सभी रोग ठीक हो जाते हैं ,आज भी सूर्य चिकित्सा का उपयोग आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। शारीरिक कमजोरी, हड्डियों की कमज़ोरी या जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों में भगवान सूर्य की आराधना करने से रोग से मुक्ति मिलने की संभावना बनती है। सूर्य की ओर मुख करके सूर्य स्तुति करने से त्वचा रोग आदि नष्ट हो जाते हैं व नेत्रज्योति बढ़ती है,ऐसा धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। श्रद्धा के साथ सूर्य पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं एवं इनकी पूजा से दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और उसके बाद तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चन्दन,चावल, लाल फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।जल चढ़ाते समय सूर्य के वरूण रूप को प्रणाम करते हुए ऊं रवये नम: मंत्र का जाप करें। इस जाप के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना करनी चाहिए। इस प्रकार जल चढ़ाने के बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें। सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल कपड़े, गेहूं, गुड़, लाल चंदन का दान करें। श्रद्धानुसार इन में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। इस दिन सूर्यदेव की पूजा के बाद एक समय फलाहार करें।