Vaikuntha Ekadashi 2020: वैकुंठ एकादशी आज, जानें पूजा मुहूर्त एवं व्रत विधि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वैकुंठ पुत्रदा एकादशी 6 जनवरी को है। प्रति वर्ष यह पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ती है। इसे पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वैकुंठ एकादशी में भगवान विष्णु की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी के पुण्य से संतान सुख की प्राप्ति होती है। वैकुंठ एकादशी के दिन तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर और श्रीरंगम के श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
वैकुंठ पुत्रदा एकादशी व्रत मुहूर्त (Vaikunth ekadashi 2020 date, time and muhurat)
7 जनवरी 2020 को पारणा मुहूर्त - 13:29:53 से 15:34:49 तक
अवधि :2 घंटे 4 मिनट
7 जनवरी 2020 को हरि वासर समाप्त होने का समय :10:07:19 पर
वैकुंठ एकादशी का महत्व
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वैकुंठ एकादशी धनुर सौर माह के दौरान पड़ती है। तमिल कैलेंडर में धनुर्मास को मार्गाज्ही मास कहते हैं। मलयालम कैलेंडर में इसे स्वर्ग वथिल एकादशी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करता है, व्रत का पालन करता है उस व्यक्ति को वैकुंठ धाम यानि स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।
वैकुंठ एकादशी व्रत के नियम
व्रत रखने वाले को दशमी के दिन लहसुन, प्याज से रहित शुद्घ भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर श्री नारायण की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए और दीपदान करना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन से ही मन और वचन से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान का ध्यान करते हुए अपना काम करना चाहिए।
जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसे एकादशी के दिन पूरे दिन निराहार रहना होता है। शाम को चाहें तो फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद स्वयं भोजन करें ऐसा नियम है। द्वादशी के दिन भी व्रती को सात्विक भोजन करना चाहिए। इस प्रकार नियमपूर्वक जो लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत करते हैं उनका व्रत ही सफल होता है।
वैकुंठ एकादशी व्रत विधि
दशमी को भोजन के बाद अच्छी तरह से दातून करना चाहिए ताकि अन्न का अंश मुंह में न रहे।
एकादशी के दिन सुबह उठकर व्रत का संकल्प कर शुद्ध जल से स्नान करना चाहिए।
इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन, रात को दीपदान करना चाहिए।
एकादशी की सारी रात भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन करना चाहिए।
श्री हरि विष्णु से अनजाने में हुई भूल या पाप के लिए क्षमा मांगनी चाहिए।
अगली सुबह पुनः भगवान विष्णु की पूजा कर ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।
भोजन के बाद ब्राह्मण को क्षमता के अनुसार दान देकर विदा करना चाहिए।