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Parshuram Jayanti 2019 : जानें किस स्थान पर आज भी अपनी मां से मिलने आते हैं भगवान परशुराम
Tue, 07 May 2019 11:00 AM IST
Madhukar Mishra
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Madhukar Mishra
Updated Tue, 07 May 2019 11:00 AM IST
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Parshuram Jayanti 2019
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सप्त चिरंजीवियों में से एक हैं भगवान परशुराम के बारे में माना जाता है कि वह एक ऐसे जीवित योद्धा हैं जो सदियों से पृथ्वी पर आज भी मौजूद हैं। भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले भगवान परशुराम जी की जयंती सात मई को अक्षय तृतीया के दिन मनाई जाएगी। कहते हैं कि भगवान राम के शौर्य, पराक्रम और धर्मनिष्ठा को देख कर भगवान परशुराम हिमालय चले गए थे। उन्होंने बुद्धिजीवियों और धर्मपुरुषों की रक्षा के लिए उठाया परशु त्याग दिया। माना जाता है कि आज भी सशरीर वे हिमालय के किन्हीं अगम्य क्षेत्रों में निवास करते हैं।
यहां हर साल आते हैं भगवान परशुराम
भगवान परशुराम के बारे मान्यता है कि साल में एक बार वह अपनी मां से मिलने हिमालय के एक दिव्य स्थान पर जरूर आते हैं। यह स्थान है हिमाचल के जिला सिरमौर की रेणुका झील, जिसे पहले राम सरोवर के नाम से जाना जाता था। इस पावन झील को भगवान परशुराम की माता रेणुका का स्थायी निवास माना जाता है, जहां पर वह सदियों से वह वास कर रही हैं।
इस घटना के कारण ली जल समाधि
मान्यता है कि जब सहस्त्रबाहु ने जमदग्नि ऋषि के आश्रम हमला किया और कामधेनु को बलपूर्वक ले जाने लगा तो महर्षि जमदाग्नि ने यह कहकर गाय देने से इंकार किया वह इसे नहीं दे सकते क्योंकि यह गाय उन्हें भगवान विष्णु ने दी है। इससे क्रोधित होकर सहस्त्रबाहु ने महर्षि की हत्या कर दी। इस घटना से दु:खी होकर भगवान परशुराम की मां रेणुका जी राम सरोवर में कूद गईं और हमेशा के लिए उसमें जलसमाधि ले ली।
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इस झील में है मां रेणुका का वास
भगवान परशुराम को जब इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने फरसे से सहस्त्रबाहु का वध कर दिया। साथ ही अपने तपबल से पिता को भी नया जीवन दे दिया। इसके पश्चात् भगवान परशुराम ने अपनी मां रेणुका से झील से बाहर आने की विनती की। तब उन्होंने कहा कि वह अब हमेशा के लिए इसी झील में वास करेंगी लेकिन साल में एक बार वह जरूर भगवान परशुराम से मिलने आएंगी। इसी के बाद इस झील भगवान परशुराम की मां के नाम से जाना जाने लगा। कहते हैं कि उसी समय रेणुका झील की आकृति भी महिला के आकार में ढल गई।
जब मां से मिलने आते हैं परशुराम
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी से लेकर पूर्णिमा तक यहां पर पांच दिन का मेला लगता है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान परशुराम अपनी मां श्री रेणुका जी से मिलने के लिए आते हैं। इसके लिए यहां मेले में विशाल शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। झील के पवित्र पानी में लाखों श्रद्घालु स्नान करते हैं। हर वर्ष यहां मेला लगाया जाता है उसमें माता-पुत्र के लम्बे जीवन की कामना की जाती है।
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यहां हर साल आते हैं भगवान परशुराम
भगवान परशुराम के बारे मान्यता है कि साल में एक बार वह अपनी मां से मिलने हिमालय के एक दिव्य स्थान पर जरूर आते हैं। यह स्थान है हिमाचल के जिला सिरमौर की रेणुका झील, जिसे पहले राम सरोवर के नाम से जाना जाता था। इस पावन झील को भगवान परशुराम की माता रेणुका का स्थायी निवास माना जाता है, जहां पर वह सदियों से वह वास कर रही हैं।
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इस घटना के कारण ली जल समाधि
मान्यता है कि जब सहस्त्रबाहु ने जमदग्नि ऋषि के आश्रम हमला किया और कामधेनु को बलपूर्वक ले जाने लगा तो महर्षि जमदाग्नि ने यह कहकर गाय देने से इंकार किया वह इसे नहीं दे सकते क्योंकि यह गाय उन्हें भगवान विष्णु ने दी है। इससे क्रोधित होकर सहस्त्रबाहु ने महर्षि की हत्या कर दी। इस घटना से दु:खी होकर भगवान परशुराम की मां रेणुका जी राम सरोवर में कूद गईं और हमेशा के लिए उसमें जलसमाधि ले ली।
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इस झील में है मां रेणुका का वास
भगवान परशुराम को जब इस घटना के बारे में पता चला तो उन्होंने अपने फरसे से सहस्त्रबाहु का वध कर दिया। साथ ही अपने तपबल से पिता को भी नया जीवन दे दिया। इसके पश्चात् भगवान परशुराम ने अपनी मां रेणुका से झील से बाहर आने की विनती की। तब उन्होंने कहा कि वह अब हमेशा के लिए इसी झील में वास करेंगी लेकिन साल में एक बार वह जरूर भगवान परशुराम से मिलने आएंगी। इसी के बाद इस झील भगवान परशुराम की मां के नाम से जाना जाने लगा। कहते हैं कि उसी समय रेणुका झील की आकृति भी महिला के आकार में ढल गई।
जब मां से मिलने आते हैं परशुराम
कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी से लेकर पूर्णिमा तक यहां पर पांच दिन का मेला लगता है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान परशुराम अपनी मां श्री रेणुका जी से मिलने के लिए आते हैं। इसके लिए यहां मेले में विशाल शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। झील के पवित्र पानी में लाखों श्रद्घालु स्नान करते हैं। हर वर्ष यहां मेला लगाया जाता है उसमें माता-पुत्र के लम्बे जीवन की कामना की जाती है।
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