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Tulsi Vivah 2020: घर पर कैसे करें तुलसी विवाह, जानें सरल विधि

Mon, 23 Nov 2020 12:34 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Mon, 23 Nov 2020 12:34 PM IST
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Tulsi Vivah 2020 know tulsi vivah vidhi and its significance
तुलसी विवाह हर साल कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन किया जाता है। - फोटो : सोशल मीडिया

Tulsi Vivah 2020 Date: तुलसी विवाह का आयोजन हिन्दू पंचांग के अनुसार, 26 नवंबर को किया जाएगा। तुलसी विवाह हर साल कार्तिक माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन किया जाता है। साल 2020 में यह एकादशी तिथि 25 नवंबर को प्रारंभ होगी और 26 तारीख को समाप्त होगी। कई जगह द्वादशी के दिन भी तुलसी विवाह किया जाता है। आइए जानते हैं घर बैठ कैसे करें तुलसी विवाह - 

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तुलसी विवाह की विधि
तुलसी के पौधे के चारो ओर मंडप बनाएं।
तुलसी के पौधे के ऊपर लाल चुनरी चढ़ाएं।
तुलसी के पौधे को शृंगार की चीजें अर्पित करें।
श्री गणेश जी पूजा और शालिग्राम का विधिवत पूजन करें।
भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं।
आरती के बाद विवाह में गाए जाने वाले मंगलगीत के साथ विवाहोत्सव पूर्ण किया जाता है।

तुलसी विवाह की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, राक्षस कुल में एक कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम वृंदा था। वह बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्ति और साधना में डूबी रहती थीं। जब वृंदा विवाह योग्य हुईं तो उसके माता-पिता ने उसका विवाह समुद्र मंथन से पैदा हुए जलंधर नाम के राक्षस से कर दिया। भगवान विष्णु जी की सेवा और पतिव्रता होने के कारण वृंदा के पति जलंधर बेहद शक्तिशाली हो गया। सभी देवी-देवता जलंधर के आतंक से डरने लगे।
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जलंधर जब भी युद्ध पर जाता वृंदा पूजा अनुष्ठान करने बैठ जातीं। वृंदा की विष्णु भक्ति और साधना के कारण जलंधर को कोई भी युद्ध में हरा नहीं पाता था। एक बार जलंधर ने देवताओं पर चढ़ाई कर दी जिसके बाद सारे देवता जलंधर को परास्त करने में असमर्थ हो रहे थे। तब हताश होकर सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गये और जलंधर के आतंक को खत्म करने पर विचार करने लगे।  
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तब भगवान विष्णु ने अपनी माया से जलंधर का रूप धारण कर लिया और छल से वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया। इससे जलंधर की शक्ति कम होती गई और वह युद्ध में मारा गया। जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता चला तो उन्होंने भगवान विष्णु को शिला यानी पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया। भगवान को पत्थर का होते देख सभी देवी-देवताओं में हाहाकार मच गया फिर माता लक्ष्मी ने वृंदा से प्रार्थना की तब जाकर वृंदा ने अपना श्राप वापस ले लिया और खुद जलांधर के साथ सती होकर भस्म हो गईं।


जब वे हुईं, तो कहते हैं कि उनके शरीर की भस्म से तुलसी का पौधा बना। फिर उनकी राख से एक पौधा निकला जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी नाम दिया और खुद के एक रूप को पत्थर में समाहित करते हुए कहा कि आज से तुलसी के बिना मैं कोई भी प्रसाद स्वीकार नहीं करूंगा। इस पत्थर को शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा। तभी से कार्तिक महीने में तुलसी जी का भगवान शालिग्राम के साथ विवाह भी किया जाता है।

2020 में तुलसी विवाह का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ - 25 नवंबर, सुबह 2:42 बजे से 
एकादशी तिथि समाप्त - 26 नवंबर, सुबह 5:10 बजे तक
द्वादशी तिथि प्रारंभ - 26 नवंबर, सुबह 05 बजकर 10 मिनट से
द्वादशी तिथि समाप्त - 27 नवंबर, सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक

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