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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Skanda Sashti July 2021 shubh muhurat puja vidhi and katha

Skanda Sashti July 2021: स्कंद षष्ठी आज, जानें मुहूर्त, व्रत विधि, मंत्र और कथा

Thu, 15 Jul 2021 07:09 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 15 Jul 2021 07:09 AM IST
सार

धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा से जीवन में हर तरह की बाधाएं दूर होती हैं और व्रत रखने वालों को सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। साथ ही संतान के कष्टों को कम करने और उसके सुख की कामना से ये व्रत किया जाता है।

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Skanda Sashti July 2021 shubh muhurat puja vidhi and katha
Skanda Sashti July 2021 - फोटो : pinterest

विस्तार

हिन्दू पंचांग के अनुसार, स्कंद षष्ठी व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के दिन रखा जाता है और आज आषाढ़ माह का स्कंद षष्ठी व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत भगवान कार्तिकेय के लिए रखा जाता है। आज के दिन उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। स्कंद षष्ठी व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में लोकप्रिय है। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े पुत्र हैं। भगवान कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा से जीवन में हर तरह की बाधाएं दूर होती हैं और व्रत रखने वालों को सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। साथ ही संतान के कष्टों को कम करने और उसके सुख की कामना से ये व्रत किया जाता है।

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स्कंद षष्ठी पूजा मुहूर्त 
षष्ठी तिथि प्रारम्भ - सुबह 07:16 बजे (15 जुलाई 2021)
षष्ठी तिथि समाप्त - सुबह 06:06 बजे, 16 जुलाई 2021)

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Skanda Sashti July 2021 shubh muhurat puja vidhi and katha
Skanda Sashti July 2021 - फोटो : pinterest

स्कंद षष्ठी व्रत विधि

  • सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करें। 
  • इसके बाद स्नान-ध्यान कर सर्वप्रथम व्रत का संकल्प लें। 
  • पूजा घर में मां गौरी और शिव जी के साथ भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा को स्थापित करें। 
  • पूजा जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र आदि से करें। 
  • अंत में आरती करें। 
  • वहीं शाम को कीर्तन-भजन पूजा के बाद आरती करें। 
  • इसके पश्चात फलाहार करें।
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भगवान कार्तिकेय की पूजा का मंत्र -
देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव।
कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥

Skanda Sashti July 2021 shubh muhurat puja vidhi and katha
स्कंद षष्ठी व्रत कथा - फोटो : सोशल मीडिया

स्कंद षष्ठी व्रत कथा
भगवान कार्तिकेय के जन्म का वर्णन हमें पुराणों में ही मिलता है। जब देवलोक में असुरों ने आतंक मचाया हुआ था, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। लगातार राक्षसों के बढ़ते आतंक को देखते हुए देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से मदद मांगी थी। भगवान ब्रह्मा ने बताया कि भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही इन असुरों का नाश होगा, परंतु उस काल च्रक्र में माता सती के वियोग में भगवान शिव समाधि में लीन थे। 

इंद्र और सभी देवताओं ने भगवान शिव को समाधि से जगाने के लिए भगवान कामदेव की मदद ली और कामदेव ने भस्म होकर भगवान भोलेनाथ की तपस्या को भंग किया। इसके बाद भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया और दोनों देवदारु वन में एकांतवास के लिए चले गए। उस वक्त भगवान शिव और माता पार्वती एक गुफा में निवास कर रहे थे। 

उस वक्त एक कबूतर गुफा में चला गया और उसने भगवान शिव के वीर्य का पान कर लिया परंतु वह इसे सहन नहीं कर पाया और भागीरथी को सौंप दिया। गंगा की लहरों के कारण वीर्य 6 भागों में विभक्त हो गया और इससे 6 बालकों का जन्म हुआ। यह 6 बालक मिलकर 6 सिर वाले बालक बन गए। इस प्रकार कार्तिकेय का जन्म हुआ।

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