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Holi 2019: भक्ति पर आघात के ये आठ दिन, जानें क्यों शुभ कार्यों के लिए होते हैं अशुभ

Wed, 13 Mar 2019 01:24 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
अनीता जैन, वास्तुविद् Published by: Madhukar Mishra Updated Wed, 13 Mar 2019 01:24 PM IST
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significance of holashtak 2019 dates Holi
होली 2019

शास्त्रों में फाल्गुन शुक्ल पक्ष अष्टमी से होलिका दहन तक के समय को ही होलाष्टक कहा गया है। इस वर्ष 14 मार्च (गुरुवार) से होलाष्टक प्रारम्भ हो रहे हैं। होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पूर्व होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखी लकड़ी, उपले व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। इसी दिन को होलाष्टक प्रारंभ का दिन माना जाता है। 

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होलाष्टक की पौराणिक मान्यता
होलाष्टक को लेकर एक पौराणिक कथा मिलती है, जिसमें भक्त प्रह्लाद की अनन्य नारायण भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने होली से पहले के आठ दिनों में प्रह्लाद को अनेकों प्रकार के जघन्य कष्ट दिए थे। तभी से भक्ति पर प्रहार के इन आठ दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है।
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होलाष्टक में वर्जित कार्य
होलाष्टक के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण एवं विद्यारंभ आदि सभी मांगलिक कार्य या कोई नवीन कार्य प्रारंभ करना शास्त्रों के अनुसार वर्जित माना गया है 
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प्रभु स्मरण करना है श्रेष्ठ
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक नवग्रह भी उग्र रूप लिए रहते हैं। इस अवधि में किए जाने वाले शुभ कार्यों में अमंगल होने की आशंका बनी रहती है। साथ ही इन दिनों में व्यक्ति के निर्णंय लेने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है। होलाष्टकों को व्रत, पूजन और हवन की दृष्टि से अच्छा समय माना गया है। इन दिनों में किए गए दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है। 


होलाष्टक का कामदेव से संबंध 
शिव पुराण के अनुसार देवताओं के अनुरोध पर कामदेव ने अपना प्रेम बाण चलाकर शिवजी की तपस्या को भंग कर दिया। इससे महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने तीसरे नेत्र की ज्वाला से कामदेव को भस्म कर दिया। प्रेम के देवता कामदेव के भस्म होते ही सारी सृष्टि में शोक व्याप्त हो गया। अपने पति को पुनः जीवित करने के लिए रति ने अन्य देवी-देवताओं सहित महादेव से प्रार्थना की। महादेव ने प्रसन्न होकर कामदेव को पुर्नजीवन का आशीर्वाद दिया। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को कामदेव भस्म हुए और आठ दिन बाद महादेव से रति को उनके पुर्नजीवन का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।

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