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कब है शरद पूर्णिमा और क्यों खास मानी जाती है तिथि ? जान लें शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय
Thu, 22 Oct 2026 02:01 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 22 Oct 2026 02:01 PM IST
सार
हर वर्ष आश्विन माह में आने वाली शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। आइए जानते हैं कब है शरद पूर्णिमा और इस दिन चंद्रोदय का समय।
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कब है शरद पूर्णिमा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक वर्ष में आने वाली सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा हर वर्ष आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। शरद पूर्णिमा को कई दूसरे नामों से भी मनाया जाता है, इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है और पूर्णिमा की रात को खुले आसमान में खीर रखने का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की भी पूजा का विधान होता है, ऐसी मान्यता है शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी धरती पर आती हैं और घर-घर विचरण करती हैं। इस वर्ष शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर थोड़ा संशय बना हुआ है कि किस दिन है शरद पूर्णिमा मनाई जाए। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की तिथि, मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और खीर रखने का महत्व।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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कब है शरद पूर्णिमा की तिथि?
- अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 25 अक्तूबर सुबह 11: 55 मिनट पर
- अश्विन माह की पूर्णिमा तिथि का समापन: 26 अक्तूबर सुबह 09: 41 मिनट पर
- शरद पूर्णिमा का पर्व: 25 अक्तूबर 2026
- शरद पूर्णिमा दान और स्नान तिथि: 26 अक्तूबर 2026
- द्रिग पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय: 25 अक्तूबर 2026 को शाम 5:40 मिनट पर।
- द्रिग पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का शुभ समय 25 अक्तूबर को रात 08 बजकर 30 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा बहुत ही खास मानी जाती है। दरअसल इस पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है।
- शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा सभी 16 कलाओं में रहते हैं जिसके चलते रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखना शुभ माना जाता है।
- ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की रोशनी जब पृथ्वी पर पड़ती है तो वह अमृत समान होती है।
- शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में औषधीय गुण होते हैं जिसके कारण सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और इस दिन पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है।
- शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा से निकलने वाली शीतल किरणें अमृत के समान होती है। जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान के नीचे दूख और चावल से बने खीर रखनी की खास परंपरा होती है। इस दिन खीर पर चंद्रमा की अमृतरूपी किरणें पड़ती है।
- शरद पूर्णिमा की रात को मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं भ्रमण करती हैं। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा और कृपा पाने का दिन होता है। इससे धन और सुखों की प्राप्ति होती है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को भगवान श्रीकृष्ण गोपियों संग महारास रचाते हैं।
- शरद पूर्णिमा की रात को दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दिन सफेद चीजों का दान का महत्व होता है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।