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Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा पर लक्ष्मी चालीसा के पाठ से दूर होंगी आर्थिक समस्याएं, बनेंगे सभी अटके काम

Mon, 06 Oct 2025 12:13 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 06 Oct 2025 12:13 PM IST
सार

Sharad Purnima Wishes 2025 in Hindi: इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर कई शुभ योग संयोग बने हुए है। ऐसे में चंद्रमा की उपासना के साथ-साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी कल्याणकारी हो सकता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के सुख में वृद्धि, धन की प्राप्ति और उसे कर्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती हैं।

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Sharad Purnima 2025 Recite Lakshmi Chalisa Benefits Remove Financial Problems and Bring Prosperity
Sharad Purnima 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sharad Purnima 2025: अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि पर शरद पूर्णिमा पड़ती है। इस बार शरद पूर्णिमा 6 अक्तूबर 2025, सोमवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन समुद्र मंथन से धन की देवी मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि पर लक्ष्मी जी की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है।

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इसके अलावा शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है। यही कारण है कि इस तिथि पर रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर बनाकर रखी जाती है और अगले दिन सुबह उसका सेवन किया जाता है। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति सहित कई अन्य स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं।

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इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर कई शुभ योग संयोग बने हुए है। ऐसे में चंद्रमा की उपासना के साथ-साथ लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना भी कल्याणकारी हो सकता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति के सुख में वृद्धि, धन की प्राप्ति और उसे कर्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। आइए इस शक्तिशाली चालीसा को जानते हैं।

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श्री लक्ष्मी चालीसा

॥ दोहा ॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥

श्री लक्ष्मी चालीसा
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥
ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥
चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥
स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥
अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥7॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥
मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥8॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥
और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥9॥

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥
त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥
ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥
विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥
सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥13॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥
प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥14॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥
करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥15॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥
तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥16॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥
भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥17॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥
नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥18॥

रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥
केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥19॥

॥ दोहा॥
त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥
रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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