शनि जयंती: हनुमानजी की पूजा से क्यों प्रसन्न होते हैं शनिदेव

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 02 Jun 2019 12:25 PM IST
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3 जून को शनि जयंती है। शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या की तिथि पर मनाई जाती है। ज्योतिष में शनि को न्यायधीश माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में शनि ग्रह अशुभ स्थिति में होता है उन्हें उनके जीवन में तरह-तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। शनि दोष को दूर करने के लिए कई तरह के उपाय बताए गए है। इन उपायों में शनि दोष को दूर करने का सबसे कारगर उपाय हनुमानजी की आराधना है। हनुमानजी की पूजा से शनि देव प्रसन्न होते हैं इसके पीछे कई पौराणिक कथा प्रचलित है। 
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हनुमानजी ने शनिदेव को पूंछ में लपेट रखा
एक बार शनिदेव जी गुजर रहे थे। रास्ते में उन्हें हनुमानजी दिखाई पड़े। हनुमान जी किसी काम में व्यस्त थे। तभी शनिदेव के दिमाग में शरारत सूझी और वे हनुमान जी को परेशान करने लगे। हनुमानजी ने शनि देव को कई बार चेतावनी दी लेकिन शनिदेव नहीं माने। इसके बाद हनुमानजी ने शनिदेव जी को अपनी पूंछ में पकड़ लिया और कार्य में दोबारा लग गए। करने लगे। शनिदेव को पूंछ में पकड़े एक स्थान से दूसरे स्थान पर कूदते रहे। जिसके कारण से शनिदेवजी को बहुत सारी चोटें आई। शनिदेव के बहुत कोशिश करने के बाद खुद को छुड़ा नहीं पाए।


शनि जयंती के अवसर पर शनि दोष निवारण पूजा (03 जून 2019, सोमवार)

कार्य खत्म होने के बाद हनुमान जी को शनिदेव की तरफ ध्यान गया तब उन्होंने शनिदेव को आजाद किया। शनिदेव जी को अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने हनुमानजी से माफी मांगी कि हनुमान जी के कार्यों में कोई बाधा नहीं डालेंगे और हनुमान जी के भक्तों को उनका विशेष कृपा प्राप्त होगी। हनुमानजी के पूंछ में बंधे रहने से शनिदेव के शरीर में कई घाव हो गए थे। तब हनुमान जी ने शनिदेव की चोट ठीक करने के लिए उन्हें सरसों का तेल दिया था और इस तरह शनिदेव के जख्म ठीक हुए। तब शनिदेव जी ने कहा की जो भक्त शनिवार के दिन मुझ पर सरसों का तेल चढ़ाएगा उसे मेरा विशेष आशीष प्राप्त होगा।

हनुमानजी ने शनि देव रावण की कैद से करवाया मुक्त
एक दूसरी कथा के अनुसार रावण ने शनिदेव जो को कैद कर लिया और उन्हें लंका की जेल में  कैदी बना लिया। काफी दिनों तक शनिदेव लंका की जेल में कैदी बन कर रहे। जब हनुमानजी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे फिर शनिदेव को आजाद करवाया। कैद से मुक्ति के बाद शनिदेव ने हनुमानजी को धन्यवाद दिया और उनके भक्तों पर विशेष कृपा रखने का वचन दिया।

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