{"_id":"5f5322de8ebc3e54ec5db1c3","slug":"pitru-paksha-2020-during-shradh-paksha-do-not-offer-these-meal-to-pitra-dev","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pitru Paksha 2020: श्राद्धपक्ष के दौरान भूलकर भी न करें भोग में इन चीजों इस्तेमाल","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Pitru Paksha 2020: श्राद्धपक्ष के दौरान भूलकर भी न करें भोग में इन चीजों इस्तेमाल
Sat, 05 Sep 2020 11:03 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 05 Sep 2020 11:03 AM IST
विज्ञापन
Pitru Paksha 2020: भोजन के पांच भाग गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और देवताओं को सबसे पहले निकाला जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हर वर्ष भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की सर्वपितृ अमावस्या तिथि तक का समय पितरों को समर्पित होता है। मान्यता है पितृपक्ष के दौरान जो जीव आत्माएं इस धरती को छोड़कर पितृलोक में चली गई हैं वह 16 दिनों के लिए अपने प्रियजनों से मिलने और उनका आशीर्वाद प्रदान करने के लिए धरती पर आती हैं। पितरों की आत्मा को तृप्ति करने के लिए श्राद्ध पक्ष के दौरान उनको तर्पण और पिंडदान दिया जाता है। श्राद्ध पक्ष का महत्व हमारे धर्म ग्रंथों में विस्तार पूर्वक किया गया है।
शास्त्रों में मृत्यु के बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्मविपाक आदि के द्वारा पापों के विधान का प्रायश्चित कहा गया है। श्राद्ध पक्ष के दौरान हर दिन अपने पूर्वजों को याद कर उनको तर्पण दिया जाता है और उनके के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पितरों को भोजन में हलवा पूड़ी और खीर को बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके साथ यह भी मान्यता है कि जब ये पूर्वज इस धरती पर जीवित थे और जीवित अवस्था में उन्हें जो प्रिय चीज खाने में पसंद होती थी उन्हीं चीजों का भोग उन्हें लगाना चाहिए।
ऐसा मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पितरदेव धरती पर हमें आशीर्वाद देने के लिए पशु-पक्षियों के जरिए हमारे आस पास मौजूद रहते हैं। पितरदेव इन जीवों के माध्यम से ही परिवार के द्वारा बनाया गया भोजन ग्रहण करते हैं। इसी कारण से पितरों को तर्पण देते समय और भोजन निकालते समय भोजन के पांच भाग गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और देवताओं को सबसे पहले निकाला जाता है।
विज्ञापन
Pitru Paksha 2020 : जानिए कब कौए का दिखना देता है धन लाभ, कब माना जाता है अपशकुन
श्राद्ध में इन पदार्थों से करें परहेज
पितरों को भोग अर्पण करते समय बड़ी ही सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ चीजों को भूलकर भी उनके के लिए बनाए भोजन में नहीं शामिल करना चाहिए।
- चना और राजमा
- मसूर और अरहर
- उड़द
- काला जीरा
- सत्तू
- मूली और खीरा
- प्याज और लहसुन
- काला नमक
- लौकी
- सरसों औ सरसों की पत्ती
- फल और मेवे
- महुआ और चना
- सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली और कैंथ
गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक इन्हें महादान कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है अतः इनका प्रयोग श्राद्ध कर्म में अति आवश्यक है।
विज्ञापन
शास्त्रों में मृत्यु के बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्मविपाक आदि के द्वारा पापों के विधान का प्रायश्चित कहा गया है। श्राद्ध पक्ष के दौरान हर दिन अपने पूर्वजों को याद कर उनको तर्पण दिया जाता है और उनके के लिए भोजन तैयार किया जाता है। पितरों को भोजन में हलवा पूड़ी और खीर को बहुत ही शुभ माना जाता है। इसके साथ यह भी मान्यता है कि जब ये पूर्वज इस धरती पर जीवित थे और जीवित अवस्था में उन्हें जो प्रिय चीज खाने में पसंद होती थी उन्हीं चीजों का भोग उन्हें लगाना चाहिए।
विज्ञापन
ऐसा मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान हमारे पितरदेव धरती पर हमें आशीर्वाद देने के लिए पशु-पक्षियों के जरिए हमारे आस पास मौजूद रहते हैं। पितरदेव इन जीवों के माध्यम से ही परिवार के द्वारा बनाया गया भोजन ग्रहण करते हैं। इसी कारण से पितरों को तर्पण देते समय और भोजन निकालते समय भोजन के पांच भाग गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी और देवताओं को सबसे पहले निकाला जाता है।
विज्ञापन
Pitru Paksha 2020 : जानिए कब कौए का दिखना देता है धन लाभ, कब माना जाता है अपशकुन
श्राद्ध में इन पदार्थों से करें परहेज
पितरों को भोग अर्पण करते समय बड़ी ही सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ चीजों को भूलकर भी उनके के लिए बनाए भोजन में नहीं शामिल करना चाहिए।
- चना और राजमा
- मसूर और अरहर
- उड़द
- काला जीरा
- सत्तू
- मूली और खीरा
- प्याज और लहसुन
- काला नमक
- लौकी
- सरसों औ सरसों की पत्ती
- फल और मेवे
- महुआ और चना
- सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली और कैंथ
गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक इन्हें महादान कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है अतः इनका प्रयोग श्राद्ध कर्म में अति आवश्यक है।