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Parsi New Year 2021: पारसी नववर्ष आज, जानिए क्या है नवरोज का इतिहास और महत्व
Mon, 16 Aug 2021 12:15 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 16 Aug 2021 12:15 PM IST
सार
पारसी समुदाय आज यानी 16 अगस्त 2021 को अपना नया वर्ष बड़े ही उत्साह के साथ मना रहे हैं। पारसी समुदाय के लोग इस नववर्ष को नवरोज कहा जाता है।
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Parsi New Year 2021: नवरोज का पर्व फारस के राजा जमशेद की याद में मनाया जाता है
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विस्तार
Parsi New Year 2021 Navroz Start Know History And Significance: हर वर्ष की तरह पारसी समुदाय आज यानी 16 अगस्त 2021 को अपना नया वर्ष बड़े ही उत्साह के साथ मना रहे हैं। पारसी समुदाय के लोग इस नववर्ष को नवरोज के नाम से जानते हैं। इसके अलावा पारसी समुदाय अपने नववर्ष को पतेती और जमशेदी नाम से भी मनाते हैं। नवरोज के मौके पर आइए जानते हैं इसक इतिहास और परंपरा के बारे में.....
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पारसी नववर्ष का इतिहास
ऐसा माना जाता है कि नवरोज का पर्व फारस के राजा जमशेद की याद में मनाया जाता है। इसी दिन यानी आज से करीब तीन हजार साल पहले राजा जमशेद ने पारसी कैलेंडर की स्थापना की थी। इस दिन पारसी परिवार के लोग नए कपड़े पहनकर अपने उपासना स्थल फायर टेंपल जाते हैं और प्रार्थना के बाद एक दूसरे को नए साल की मुबारकबाद देते हैं। साथ ही इस दिन घर की साफ-सफाई कर घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है और कई तरह के पकवान भी बनते हैं।
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दरअसल सातवीं शताब्दी में जब ईरान में धर्म परिवर्तन की मुहिम चली तो वहां के कई पारसियों ने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया, लेकिन कई पारसी जिन्हें यह धर्म परिवर्तन करना मंजूर नहीं था वे लोग ईरान को छोड़कर भारत आ गए और इसी धरती पर अपने संस्कारों को सहेज कर रखना शुरू कर दिया।
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भारत और पाकिस्तान में बसे पारसी समुदाय के लोग विश्व के दूसरे देशों में बसे हुए पारसी के 200 दिनों के बाद अगस्त महीने में नया वर्ष मनाते हैं। भारत में ज्यादातर पारसी समुदाय गुजरात और महाराष्ट्र में बसे हुए है इस वजह से यह पर्व वहां जोर शोर से मनाया जाता है।
नववर्ष पारसी समुदाय में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। पारसी धर्म में इसे खौरदाद साल के नाम से जाना जाता है। पारसियों में 1 साल 360 दिन का होता है और बाकी बचें 5 दिन गाथा के रूप में अपने पूर्वजों को याद करने के लिए रखा जाता है। साल के खत्म होने के ठीक 5 दिन पहले इसे मनाया जाता है।