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Nirjala Ekadashi 2020: 2 जून को निर्जला एकादशी व्रत, जानें इस व्रत का धार्मिक महत्व
Wed, 27 May 2020 07:26 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Wed, 27 May 2020 07:26 AM IST
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निर्जला एकादशी 2020
- फोटो : सोशल मीडिया
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Nirjala Ekadashi 2020: निर्जला एकादशी व्रत ज्येष्ठ शुक्ल की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस बार यह तिथि 2 जून को पड़ रही है। इसे भीमसेन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत बिना जल पीये रखा जाता है। व्रत के पूर्ण हो जाने के बाद ही जल ग्रहण करने का विधान है। व्रत करने वालों को जगत के पालनहार भगवान विष्णु जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिन
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन के साथ इस व्रत को करता है उसे समस्त एकादशी व्रत में मिलने वाला पुण्य प्राप्त होता है। वह सभी प्रकार के कष्टों से मुक्त हो जाता है। व्रत के साथ-साथ इस दिन दान कार्य भी किया जाता है। दान करने वाले व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। कलश दान करना बेहद ही शुभ माना जाता है। इससे व्यक्ति को सुखी जीवन और दीर्घायु प्राप्त होती है।
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निर्जला एकादशी मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ - 02:57 PM (01 जून 2020)
एकादशी तिथि समाप्त - 12:04 PM (02 जून 2020)
पारण मुहूर्त - 05:23 AM से 08:8 AM तक (03 जून 2020)
निर्जला एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत काल के समय एक बार पाण्डु पुत्र भीम ने महर्षि वेद व्यास जी से पूछा- हे परम आदरणीय मुनिवर! मेरे परिवार के सभी लोग एकादशी व्रत करते हैं और मुझे भी व्रत करने के लिए कहते हैं। लेकिन मैं भूखा नहीं रह सकता हूं अत: आप मुझे कृपा करके बताएं कि बिना उपवास किए एकादशी का फल कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
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भीम के अनुरोध पर वेद व्यास जी ने कहा- पुत्र! तुम ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन निर्जल व्रत करो। इस दिन अन्न और जल दोनों का त्याग करना पड़ता है। जो भी मनुष्य एकादशी तिथि के सूर्योदय से द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक बिना पानी पीये रहता है और सच्ची श्रद्धा से निर्जला व्रत का पालन करता है, उसे साल में जितनी एकादशी आती हैं उन सब एकादशी का फल इस एक एकादशी का व्रत करने से मिल जाता है। तब भीम ने व्यास जी की आज्ञा का पालन कर निर्जला एकादशी का व्रत किया था।