फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   know worship method and importance of Sheetla Saptami vrat 2019

Sheetla Saptami 2019 : 24 जुलाई को रखा जाएगा शीतला सप्तमी का व्रत, जाने पूजन विधि एवं महत्व

Mon, 22 Jul 2019 11:53 AM IST
Madhukar Mishra पं. जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिर्विद्
पं. जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिर्विद् Published by: Madhukar Mishra Updated Mon, 22 Jul 2019 11:53 AM IST
विज्ञापन
know worship method and importance of Sheetla Saptami vrat 2019
sheetla mata - फोटो : Rohit Jha

श्रावण कृष्ण सप्तमी को महाशक्ति के अनंत रूपों में से प्रमुख शीतला माता की पूजा प्राचीनकाल से ही की जाती रही है। गृहस्थों के लिए माँ की आराधना दैहिक तापों ज्वर, राजयक्ष्मा, संक्रमण तथा अन्य विषाणुओं के दुष्प्रभावों से मुक्ति दिलाती है। विशेष रूप से बुखार, चेचक, कुष्ठ रोग, दाह ज्वर, पीत ज्वर, दुर्गन्धयुक्त फोड़े तथा अन्य चर्मरोगों से आहत होने पर माँ की आराधना रोगमुक्त कर देती है। यही नहीं व्रती के कुल में भी यदि कोई इन रोगों से पीड़ित हो तो माँ शीतलाजनित ये रोग-दोष दूर हो जाते हैं।

विज्ञापन


क्या है धन, प्यार, नौकरी, मकान, शादी अथवा व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, जानिये हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से मात्र 99 रुपये में। (विज्ञापन)

विज्ञापन

know worship method and importance of Sheetla Saptami vrat 2019
Sheetla Mata

माता शीतला की कृपा से देह अपना धर्माचरण कर पाता है। बिना शीतला माता की कृपा के देहधर्म संभव नहीं है। ऋषि-मुनि-योगी भी इनका स्तवन करते हुए कहते हैं कि — 

''शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः।। 


अर्थात् - हे! माँ शीतला आप ही इस संसार की आदि माता हैं, आप ही पिता हैं और आप ही इस चराचर जगत को धारण करतीं हैं, अतः आप को बारम्बार नमस्कार है। माँ का यह पौराणिक मंत्र ''ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः'' भी प्राणियों को सभी संकटों से मुक्ति दिलाते हुए समाज में मान सम्मान पद एवं गरिमा की वृद्धि कराता है। 

क्या है धन, प्यार, नौकरी, मकान, शादी अथवा व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, जानिये हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से मात्र 99 रुपये में। (विज्ञापन)

know worship method and importance of Sheetla Saptami vrat 2019

जो भी भक्त शीतला माँ की प्रतिदिन साधना-आराधना करते हैं, माँ उनपर अनुग्रह करती हुई, उनके घर-परिवार की सभी विपत्तिओं से रक्षा करती हैं। इनका ध्यान करते हुए शास्त्र कहते हैं कि —

'वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्। 
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।


अर्थात् मैं गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाड़ू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तक वाली भगवती शीतला की वंदना करता हूं। इस वंदना मंत्र से यह पूर्णत: स्पष्ट हो जाता है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में झाड़ू होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश में सभी तैतीस करोड़ देवी-देवताओं का वास रहता है, अत: इसके स्थापन-पूजन से घर परिवार में समृद्धि आती है। स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना का स्तोत्र 'शीतलाष्टक' के रूप में प्राप्त होता है, इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने जनकल्याण के लिए की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है, साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करता है। मां शीतला की आराधना मध्य भारत एवं उत्तरपूर्व के राज्यों में बड़ी धूम-धाम से की जाती है।

क्या है धन, प्यार, नौकरी, मकान, शादी अथवा व्यापार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, जानिये हमारे प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से मात्र 99 रुपये में। (विज्ञापन)

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed