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भगवान विष्णु के उस महाव्रत की कथा जो दिलाता है पापों से मुक्ति और मोक्ष का वरदान
Tue, 30 Apr 2019 08:07 AM IST
Madhukar Mishra
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Madhukar Mishra
Updated Tue, 30 Apr 2019 08:07 AM IST
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Varuthini Ekadashi 2019
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भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। इस पावन तिथि पर किया जाने वाला व्रत जीवन में सभी प्रकार की सफलता दिलाता है। प्रत्येक मास में पड़ने वाली इस एकादशी को अलग-अलग नाम से पुकारते हैं। जैसे वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी कहते हैं। इस साल यह पावन तिथि 30 अप्रैल, मंगलवार को पड़ रही है।
मान्यता है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान करने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने और कन्यादान से मिलता है, वह मात्र वरुथिनी एकादशी व्रत की पूजा से मिल जाता है। इसे समस्त पापों का हरण करने वाली तिथि भी कहा जाता है। इस दिन व्रत धारण करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है व जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है।
पुराणों में वरुथनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदायिनी कहा गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करते हुए जो व्यक्ति भगवान मधुसूदन की पूजा करता उसके सारे पाप और ताप दूर हो जाता हैं। व्रत के पुण्य से उस व्यक्ति को स्वर्ग अथवा अन्य उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है।
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भगवान मधुसूदन की कृपा और मोक्ष दिलाने वाले इस व्रत की पावन कथा को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
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मान्यता है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान करने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने और कन्यादान से मिलता है, वह मात्र वरुथिनी एकादशी व्रत की पूजा से मिल जाता है। इसे समस्त पापों का हरण करने वाली तिथि भी कहा जाता है। इस दिन व्रत धारण करने से व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है व जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है।
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पुराणों में वरुथनी एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदायिनी कहा गया है। मान्यता है कि इस व्रत को करते हुए जो व्यक्ति भगवान मधुसूदन की पूजा करता उसके सारे पाप और ताप दूर हो जाता हैं। व्रत के पुण्य से उस व्यक्ति को स्वर्ग अथवा अन्य उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है।
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भगवान मधुसूदन की कृपा और मोक्ष दिलाने वाले इस व्रत की पावन कथा को जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
Varuthini Ekadashi 2019
वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा
प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा राज किया करते थे। राजा बड़े ही उदार धार्मिक विचारों वाले थे। एक बार जब राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इससे घबराया नहीं और अपनी तपस्या में लीन रहा। कुछ देर बाद पैर चबाते-चबाते भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। अब राजा घबराया लेकिन तपस्या और धर्म के कारण क्रोध और हिंसा न करके राजा भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा। राजा की पुकार सुनकर भक्तवत्सल भगवान श्री विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला।
राजा का पैर भालू खा चुका था। इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुए। उसे दुःखी देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।
साल 2019 के आने वाले महीनों में एकादशी कब-कब पड़ेगी, जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा राज किया करते थे। राजा बड़े ही उदार धार्मिक विचारों वाले थे। एक बार जब राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इससे घबराया नहीं और अपनी तपस्या में लीन रहा। कुछ देर बाद पैर चबाते-चबाते भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। अब राजा घबराया लेकिन तपस्या और धर्म के कारण क्रोध और हिंसा न करके राजा भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगा। राजा की पुकार सुनकर भक्तवत्सल भगवान श्री विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने चक्र से भालू को मार डाला।
राजा का पैर भालू खा चुका था। इससे राजा बहुत ही शोकाकुल हुए। उसे दुःखी देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करो। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।
साल 2019 के आने वाले महीनों में एकादशी कब-कब पड़ेगी, जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें —
Varuthini Ekadashi 2019
आने वाले माह में एकादशी व्रत
अप्रैल
30 अप्रैल — वरुथनी एकादशी
मई
15 मई — मोहिनी एकादशी
30 मई — अपरा एकादशी
जून
13 जून — निर्जला एकादशी
29 जून — योगिनी एकादशी
जुलाई
12 जुलाई — देवशयनी एकादशी
28 जुलाई — कामदा एकादशी
अगस्त
11 अगस्त — पवित्रा एकादशी
26 अगस्त — अजा एकादशी
सितंबर
09 सितंबर — पद्मा एकादशी
25 सितंबर — इंदिरा एकादशी
अक्टूबर
09 अक्टूबर — पापकुशा एकादशी
24 अक्टूबर — रमा एकादशी
नवंबर
08 नवंबर — देवप्रबोधिनी एकादशी
22 नवंबर — उत्पत्ति एकादशी
दिसंबर
08 दिसंबर — मोक्षदा एकादशी
22 दिसंबर — सफला एकादशी
अप्रैल
30 अप्रैल — वरुथनी एकादशी
मई
15 मई — मोहिनी एकादशी
30 मई — अपरा एकादशी
जून
13 जून — निर्जला एकादशी
29 जून — योगिनी एकादशी
जुलाई
12 जुलाई — देवशयनी एकादशी
28 जुलाई — कामदा एकादशी
अगस्त
11 अगस्त — पवित्रा एकादशी
26 अगस्त — अजा एकादशी
सितंबर
09 सितंबर — पद्मा एकादशी
25 सितंबर — इंदिरा एकादशी
अक्टूबर
09 अक्टूबर — पापकुशा एकादशी
24 अक्टूबर — रमा एकादशी
नवंबर
08 नवंबर — देवप्रबोधिनी एकादशी
22 नवंबर — उत्पत्ति एकादशी
दिसंबर
08 दिसंबर — मोक्षदा एकादशी
22 दिसंबर — सफला एकादशी