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सद्गुरु श्री जग्गी वासुदेव से जानें दीपावली का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

Wed, 07 Nov 2018 11:57 AM IST
सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन
सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन Updated Wed, 07 Nov 2018 11:57 AM IST
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know spiritual significance of diwali by sadhguru jaggi vasudev
दीपावली 2018

भारतीय संस्कृति में एक दौर ऐसा भी था, जब साल के हर दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता था। कहने का तात्पर्य तीन सौ पैंसठ दिन और तीन सौ पैंसठ त्योहार। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह थी कि हम चाहते थे कि हमारा पूरा जीवन एक उत्सव बन जाए। दुर्भाग्य से आप सड़क चलते, दफ्तर में या काम के दौरान यूं ही उत्सव नहीं मनाते, इसलिए ये त्योहार उत्सव मनाने का एक बहाना भर थे। दिवाली मनाने के पीछे भी विचार यही था कि आपकी जिंदगी में उत्सव मनाने का विचार लाया जा सके, इसीलिए इस दिन पटाखे जलाए जाते हैं, ताकि थोड़ी सी चिंगारी व उत्साह का संचार आपके भीतर भी हो सके।

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दीपावली के त्योहार का मकसद यह नहीं है कि बस एक दिन मौज मस्ती की और उसके बाद फिर वैसे ही सुस्त पड़ गए। नहीं, इसका असली मकसद है कि साल के हर दिन हमारे अंदर वही उमंग और उत्साह रहे। अगर हम यूं सहज बैठें तो हमारी जीवन ऊर्जा, दिल, दिमाग, शरीर एक पटाखे की तरह उमंग से भरा रहे। लेकिन अगर आप भीगी हुई फुलझड़ी हैं, तो आपको रोजाना किसी बाहरी पटाखे की जरूरत होगी।
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दिवाली रोशनी का त्योहार है। इस दिन आपको हर शहर, कस्बा और गांव हजारों दीयों से जगमगाता मिलेगा, लेकिन असली चीज बाहर दीये जलाना नहीं है, बल्कि भीतर का दीया जलाना है, आपके भीतर रोशनी होनी चाहिए। रोशनी का मतलब है स्पष्टता। आपमें चाहे कोई भी गुण हो, स्पष्टता के बिना वह आपका कोई भला नहीं करेगा, बल्कि आपका अहित ही करेगा क्योंकि स्पष्टता के अभाव में आत्मविश्वास भी खतरनाक होता है। यह विडंबना ही है कि आजकल दुनिया में बहुत सारे काम बिना स्पष्टता के ही किए जा रहे हैं।
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एक बार की बात है, एक नया पुलिसवाला अपने एक अनुभवी साथी के साथ शहर से होकर गुजर रहा था। रेडियो पर उन्हें संदेश मिला कि कुछ लोग फलां गली में मटरगश्ती कर रहे हैं। उन्हें वहां से तितर-बितर करना है। वे दोनों एक गली में पहुंचे। उन्होंने देखा कि एक जगह लोगों की एक भीड़ खड़ी है। जैसे ही उनकी गाड़ी उन लोगों के करीब पहुंची, नए पुलिसवाले ने बड़े उत्साह के साथ गाड़ी की खिड़की खोली और बोला, ‘ए, तुम लोगों ने यहां भीड़ क्यों लगा रखी है, हटो यहां से।’ लोगों ने एक दूसरे की तरफ उलझन भरी निगाह से देखा। पुलिसवाला फिर चिल्लाया, ‘तुम लोगों ने सुना नहीं? मैंने कहा कि इस जगह से हट जाओ।’ वे सब वहां से हट गए। यह सोचकर कि उसने अपनी पहली ड्यूटी में ही शानदार काम किया है, नौसिखिए पुलिसवाले ने अपने अनुभवी साथी से पूछा, ‘मैंने ठीक किया न?’ उसके साथी ने कहा, ‘हां, ज्यादा गलती तो नहीं की, बस यही किया कि बस स्टॉप से लोगों को भगा दिया।’

तो कहने का मतलब है कि बिना स्पष्टता के आप जो भी करेंगे, वह खतरनाक ही होगा। भीतरी प्रकाश आपकी सोच में स्पष्टता लाता है। जीवन को आप कितनी स्पष्टता के साथ देखते हैं और अपने इर्द-गिर्द की चीजों को कितनी अच्छी तरह से समझते-बूझते हैं, इसी से तय होता है कि आप अपने जीवन को कितनी समझदारी से चलाते हैं।


दिवाली ऐसा दिन है जब दुष्ट ताकतों का अंत होता है और प्रकाश फैलता है। यही इंसानी जिंदगी की उलझन भी है। घने काले बादल आकाश में छा जाते हैं, बिना इस एहसास के कि वे सूर्य की रोशनी को रोक रहे हैं। किसी इंसान को प्रकाश कहीं से लाना नहीं है। अगर वह इन घने बादलों को हटा दे, जो उसके अंदर जमा हो गए हैं, तो उजाला अपने आप ही हो जाएगा। प्रकाश का पर्व इसी बात को याद दिलाता है।

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