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पूर्णिमा श्राद्ध : इस पूजन विधि से पाएं पितरों का पूरा आशीर्वाद
पं. धनंजय दूबे, ज्योतिषाचार्य
Updated Mon, 24 Sep 2018 12:31 PM IST
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पितरों के प्रति आभार जताने का महापर्व आज से प्रारंभ हो रहा है। पूर्णिमा के दिन का श्राद्ध उनके लिए समर्पित है जो आज के दिन इस दुनिया से विदा हो गए थे। मुख्य रूप से आज का श्राद्ध ऋषियों को समर्पित होता है। वे पूज्य ऋषिगण जो हमारे पूर्वज रहें हैं। जिनके नाम पर हमारा गोत्र है। श्राद्ध पर्व के पहले दिन उन ऋषियों के निमित्त तर्पण करने और खीर चढ़ाने का बहुत महत्व है।
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कैसे करें पितरों का श्राद्ध
सर्वप्रथम दिवंगत व्यक्ति की तस्वीर सामने रखें। इसके पश्चात् चंदन का माला और सफेद चंदन का तिलक करें। इसके बाद खीर में इलाइची, केशर, शक्कर, शहद आदि मिला कर खीर बना लें और गाय के गोबर के उपले में अग्नि प्रज्जवलित कर अपने पितरो के निमित्त तीन पिंड बना कर आहुति दें।
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इनके लिए निकालें ग्रास
पूजन के पश्चात् गाय, कौआ और कुत्तों के लिए ग्रास निकालें। इसके बाद ब्राह्मण भोजन करवाएं और उसके पश्चात् स्वयं भी भोजन का प्रसाद ग्रहण करें।
माफी मांग करें कल्याण की कामना
यदि जाने-अनजाने आपने पूर्वजो का दिल दुखाया हो, जिसके चलते वो आप से रूठ गए हों और आप पर उनकी कृपा न हो रही हो तो पितृपक्ष में आप उनके प्रति आभार जताकर, माफी मांगकर उनका आशीर्वाद पा सकते हैं। यदि आपसे भूलवश कोई अपराध हो गया हो और अपराध बोध से ग्रसित हों तो आप अपने गुरु से अपनी बात कहकर, अपने पितरों से क्षमा मांगें। उनके तस्वीर पर तिलक करें और उनके निमित्त संध्या के समय तिल के तेल का दीपक जरूर प्रज्जवलित करें। साथ ही पूरे परिवार के साथ उनकी तिथि पर लोगो में यथासंभव भोजन बांटे। आपके द्वारा गलती मान लेने पर पितृ प्रसन्न होंगे और उनके आशीर्वाद से आपका कल्याण होगा।
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पूवर्जों के निमित्त क्या करें दान
पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की मनपसंद चीजों का दान देना चाहिए। दान में सर्वप्रथम गोदान करवाना चाहिए। साथ ही यथासंभव तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, गुड़, चांदी, पैसा, नमक और फल का दान देना चाहिए। ध्यान रहे कि यह समस्त दान संकल्प करवा कर ही देना चाहिए और अपने पुरोहित या ब्राह्मण को देना चाहिए।
रखें इन बातों का ख्याल
पितृपक्ष में कोई उत्साहवर्धक कार्य नहीं करना चाहिए। यह समय पितरों को भावभीनी श्रंद्धाजलि का होता है। साथ ही तामसिक भोजन से बचना चाहिए। घर के प्रत्येक सदस्य के द्वारा दिवंगत आत्मा हेतु दान जरूर करवाना चाहिए। परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वह अपने पितरों को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके निमित्त किसी गरीब असहाय व्यक्ति को भोजन और वस्त्र दान करे।