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ज्येष्ठ वट पूर्णिमा व्रत 16 जून को, जानें महत्व और पूजा विधि
Sat, 15 Jun 2019 01:05 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 15 Jun 2019 01:05 PM IST
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हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। सभी पूर्णिमा में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को खास माना गया है। इसमें दान और गंगा स्नान का अधिक महत्व माना गया है। इस दिन गंगा स्नान से पापो से मुक्ति मिल जाती है। भारत के कुछ जगहों पर ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। वट पूर्णिमा पर शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी आयु की मनोकामना के लिए व्रत रखती है।
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वट वृक्ष का महत्व
हिन्दू धर्म में वट के वृक्ष को बहुत महत्व दिया जाता है। वट का मतलब होता है बरगद। आध्यात्मिक दृष्टि से माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं का सुहाग अजर-अमर रहता है धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं।
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वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना जाता है। यह इकलौता ऐसा वृक्ष है, जिसे तीनों देवों के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। जिनके प्रसन्न होने पर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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वट पूर्णिमा व्रत की विधि-
- एक और बांस की टोकरी लें और उसमें धूप, दीप कुमकुम, अक्षत, मोली आदि रखें।
- इसके बाद बांस के बने पंखे से सत्यवान और सावित्री को हवा करते हुए वट वृक्ष के एक पत्ते को अपने बालों में लगाकर रखा जाता है।
- इसके बाद प्रार्थना करते हुए लाल मौली या सूत के धागे को लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा करते हैं और घूमकर वट वृक्ष को मौली या सूत के धागे से 7 बार बांधते हैं।
- यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद कथा सुनते हैं और पंडित जी को दक्षिणा देते हैं।
- पूजा के बाद घर के बड़ों के पैर छूकर आर्शीवाद लें। इसके बाद मिठाई खाकर अपना व्रत खोलें।
शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत: 16 जून 2019 को सुबह 09:31 बजे से
पूर्णिमा तिथि कब खत्म होगी: 17 जून 2019 को 09:30 बजे तक