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Guru Purnima 2025 Date: गुरु पूर्णिमा आज, जानिए पूजा विधि और क्यों है गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर

Thu, 10 Jul 2025 06:28 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 10 Jul 2025 06:28 AM IST
सार

Guru Purnima 2025 Date: गुरु पूर्णिमा से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित किया था। वेदव्यास जी को 'आदि गुरु' भी कहा जाता है।

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Guru Purnima 2025 Date Guru Purnima Kab Hai Puja Vidhi Importance Shubh Muhurat Significance
Guru Purnima 2025 - फोटो : adobe stock

विस्तार

Guru Purnima 2025 Date:  आज गुरु पूर्णिमा का पर्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई 2025 को मनाई जा रही है। यह तिथि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आती है, और इसी दिन को गुरु की महिमा को समर्पित माना गया है। भारत सहित नेपाल और बौद्ध देशों में भी यह दिन श्रद्धा और आभार के साथ मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी अत्यंत विशिष्ट है।
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गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में सबसे ऊंचा माना गया है। 'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है उसे हटाने वाला। यानी गुरु वह होता है जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है। गुरु पूर्णिमा को मनाने का मूल उद्देश्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करना होता है।
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गुरु पूर्णिमा की पौराणिक मान्यताएं
गुरु पूर्णिमा से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन कर उन्हें व्यवस्थित किया था। वेदव्यास जी को 'आदि गुरु' भी कहा जाता है, और उनके सम्मान में ही इस दिन को "व्यास पूर्णिमा" भी कहा जाता है।
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बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुसार, भगवान गौतम बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद पहली बार सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को उपदेश इसी दिन दिया था। यही कारण है कि बौद्ध समुदाय में भी यह दिन विशेष पूजा और ध्यान के साथ मनाया जाता है।

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गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि
गुरु पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं। फिर घर या मंदिर में गुरु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है और उन्हें पुष्प, वस्त्र, अक्षत, धूप-दीप आदि से पूजन कर आरती की जाती है। गुरु को दक्षिणा, वस्त्र या अन्य श्रद्धा अनुसार भेंट दी जाती है।


यदि व्यक्ति के जीवन में कोई जीवित गुरु हैं, तो उन्हें जाकर साक्षात प्रणाम कर आशीर्वाद लेना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। कई स्थानों पर गुरु के चरण धोकर उन्हें स्नान कराकर पूजा की परंपरा भी निभाई जाती है। इसके अलावा, वेदपाठ, भजन, कीर्तन, ध्यान, और सत्संग का भी आयोजन होता है।

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गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मबोध, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का दिन भी है। यह दिन आत्मिक गुरु या ईश्वर के उस स्वरूप को समर्पित होता है जो जीवन को दिशा देता है। इस दिन व्रत रखने और गुरु मंत्र का जाप करने से विशेष फल मिलता है। यह दिन शिक्षकों, संतों, साधु-संतों और मार्गदर्शकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ अवसर है।

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