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Guru Arjan Dev Jayanti 2020: जानें सिखों के पंचम गुरु अर्जुन देव के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य

Tue, 14 Apr 2020 07:41 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 14 Apr 2020 07:41 AM IST
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guru arjan dev jayanti 2020 interesting facts of sikh guru arjan dev ji
गुरु अर्जुनदेव जयंती 2020 - कीर्तन

Guru Arjan Dev Jayanti 2020: गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवें गुरु थे। उन्होंने अपना जीवन धर्म और लोगों की सेवा में बलिदान कर दिया। वे दिन रात संगत और सेवा में लगे रहते थे। वे सभी धर्मों को एक समान दृष्टि से देखते थे। आइए जानते हैं गुरु अर्जुन देव के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।

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गुरु अर्जुन देव जी का जन्म 15 अप्रैल साल 1563 में हुआ था। वे गुरु रामदास और माता बीवी भानी के पुत्र थे। उनके पिता गुरु रामदास स्वयं सिखों के चौथे गुरु थे, जबकि उनके नाना गुरु अमरदास सिखों के तीसरे गुरु थे।
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गुरु अर्जुन देव जी का बचपन गुरु अमर दास की देखरेख में बीता था। उन्होंने ही अर्जुन देव जी को गुरमुखी की शिक्षा दी। साल 1579 में उनका विवाह माता गंगा जी के साथ हुआ था। दोनों का पुत्र हुआ जिनका नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठे गुरु बने।
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साल 1581 में गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवे गुरु बने। उन्होंने ही अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस गुरुद्वारे का नक्शा स्वयं अर्जुन देव जी ने ही बनाया था।

उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन भाई गुरदास के सहयोग से किया था। उन्होंने रागों के आधार पर गुरु वाणियों का वर्गीकरण भी किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्वयं गुरु अर्जुन देव के हजारों शब्द हैं। उनके अलावा इस पवित्र ग्रंथ में भक्त कबीर, बाबा फरीद, संत नामदेव, संत रविदास जैसे अन्य संत-महात्माओं के भी शब्द हैं।

श्री गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। मुगल शासक जहांगीर ने 30 मई साल 1606 में उन्हें लाहौर में भीषण गर्मी के दौरान गर्म तवे पर बिठाकर शहीद कर दिया। इस दौरान उनके ऊपर गर्म रेत डाली गई और अन्य प्रकार की यातनाएं दी गईं।


यातना के कारण गुरु जी का शरीर बेहद बुरी तरह से जल गया था। बाद में उन्हें ठंडे पानी से नहाने के लिए रावी नदी में ले जाया गया जहां उनके प्राण पखेरू हो गए। उनके स्मरण में रावी नदी के किनारे गुरुद्वारा डेरा साहिब का निर्माण कराया गया, जो वर्तमान में पाकिस्तान में है।

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