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Good Friday 2019 : 19 अप्रैल को मनाया जाएगा गुड फ्राइडे क्यों? जानिए इसके बारे में सब कुछ
Mon, 15 Apr 2019 12:17 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 15 Apr 2019 12:17 PM IST
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good friday 2019
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19 अप्रैल 2019 को ईसाई समुदाय का खास पर्व गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। ईसाई धर्म को मनाने वाले लोगों के लिए गुड फ्राइडे का विशेष महत्व होता है। इसी दिन प्रेम और क्षमा करने की प्रेरणा देने वाले ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इस शोक और बलिदान के पर्व को भी उत्साह के साथ मनाया जाता है। गुड फ्राइडे के नाम में भले ही गुड यानि अच्छे की कामना हो लेकिन इस दिन का इतिहास काफी दुखदायी, पीड़ादायी, दर्दनाक और त्रासदीपूर्ण है।
दरअसल दिन दुनिया को प्रेम, क्षमा और सहनशीलता का ज्ञान देने वाले ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। तमाम तरह की यातनाओं को सहने के बावजूद ईसा मसीह ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में सूली पर चढ़ाने वाले लोगों को प्रभु से माफ करने की प्रार्थना की थी। तभी से बलिदान दिवस को गुड फ्राइडे के रुप में मनाते हैं। इस दिन को लोग गुड फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे, ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। प्रभु ईसा मसीह की याद में इस दिन ईसाई समुदाय के लोग उपवास रखते हैं और गिरजाघरों में प्रार्थनाएं करते हैं। साथ ही इस दिन प्रभु ईसा के दिए गए उपदेशों और शिक्षाओं को याद करते हैं।
गुड फ्राइडे को गुड क्यों कहते हैं
ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रभु यीशु को बिना कोई अपराध के उन्हें कठोर से कठोर सजा देते हुए सूली पर लटका दिया गया था। प्रभु यीशु ने अपने हत्यारो का सजा देने बजाय प्रभु से इनको माफ करने की प्रार्थना की थी। जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था उस दिन फ्राइडे था। तभी से इस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है। सूली पर लटकाए जाने के तीन दिन बाद रविवार को ईसा मसीह फिर से जीवित हो उठे थे। इस दिन को ईस्टर संडे कहते है।
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प्रभु यीशु को क्यों लटकाया गया था सूली पर
ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार यीशु ईश्वर के अवतार थे। ईश्वर ने उन्हें पृथ्वी से अज्ञानता और अंधकार को मिटाने के लिए भेजा था। ईसा मसीह लोगों को ज्ञान की बातें और ईश्वर का बखान करते थे उस वक्त यहूदियों के कट्टरपंथी धर्मगुरुओं ने यीशु का बहुत पुरजोर तरीके से विरोध किया। कट्टरपंथियों धर्मगुरुओं ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की शिकायत कर दी। रोमन साम्राज्य हमेशा इस बात से डरते थे कि कहीं यहूदी क्रांति न कर दें। इसी के चलते यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया गया।
दी गई थी कठोर यातनाएं
गुड फ्राइडे के दिन प्रभु ईसा को सूली पर लटकाए जाने से पहले उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी। उनके सिर पर कांटो का ताज पहनाया गया। फिर सूली को कंधों पर उठाकर ले जाने को कहा गया इस दौरान उन पर लगातार चाबुक बरसाए गए। फिर बेरहमी से कीलों से उनको सूली पर लटका दिया गया। कहते है कि करीब 6 घंटे वह सूली पर लटके रहे। बाइबिल के अनुसार जब प्रभु ईसा अपने प्राण त्याग रहे थे तो उन्होंने ईश्वर को पुकारकर कहा कि हे पिता मैं अपनी आत्मा को तुम्हारे हाथों को सौंपता हूं। फिर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इस दिन गिरजाघरों में ईसाई धर्म को मनाने वाले लोग सभी को ईसा मसीह की तरह इंसान से प्रेम और उनके अपराधों को माफ करने का संदेश देते हैं।
दोबारा जीवित होकर 40 दिन का दिया उपदेश
ऐसी मान्यता कि गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे। जिसे ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे कहते हैं। ईसा मसीह अपने शिष्यों के लिए वापस आए थे और 40 दिनों तक उनके बीच जाकर उपदेश देते रहे। ईस्टर संडे के दिन लोग चर्च में जमा होते हैं और प्रभु यीशु को याद करते हैं। ईसा मसीह के जी उठने की खुशी में लोग प्रभु भोज में भाग लेते हैं। ईस्टर की आराधना प्रातःकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था इसे सनराइज सर्विस कहते हैं।
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दरअसल दिन दुनिया को प्रेम, क्षमा और सहनशीलता का ज्ञान देने वाले ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। तमाम तरह की यातनाओं को सहने के बावजूद ईसा मसीह ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में सूली पर चढ़ाने वाले लोगों को प्रभु से माफ करने की प्रार्थना की थी। तभी से बलिदान दिवस को गुड फ्राइडे के रुप में मनाते हैं। इस दिन को लोग गुड फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे, ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। प्रभु ईसा मसीह की याद में इस दिन ईसाई समुदाय के लोग उपवास रखते हैं और गिरजाघरों में प्रार्थनाएं करते हैं। साथ ही इस दिन प्रभु ईसा के दिए गए उपदेशों और शिक्षाओं को याद करते हैं।
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गुड फ्राइडे को गुड क्यों कहते हैं
ईसाई धर्म ग्रंथों के अनुसार प्रभु यीशु को बिना कोई अपराध के उन्हें कठोर से कठोर सजा देते हुए सूली पर लटका दिया गया था। प्रभु यीशु ने अपने हत्यारो का सजा देने बजाय प्रभु से इनको माफ करने की प्रार्थना की थी। जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था उस दिन फ्राइडे था। तभी से इस दिन को गुड फ्राइडे कहा जाता है। सूली पर लटकाए जाने के तीन दिन बाद रविवार को ईसा मसीह फिर से जीवित हो उठे थे। इस दिन को ईस्टर संडे कहते है।
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प्रभु यीशु को क्यों लटकाया गया था सूली पर
ईसाई धर्म की मान्यताओं के अनुसार यीशु ईश्वर के अवतार थे। ईश्वर ने उन्हें पृथ्वी से अज्ञानता और अंधकार को मिटाने के लिए भेजा था। ईसा मसीह लोगों को ज्ञान की बातें और ईश्वर का बखान करते थे उस वक्त यहूदियों के कट्टरपंथी धर्मगुरुओं ने यीशु का बहुत पुरजोर तरीके से विरोध किया। कट्टरपंथियों धर्मगुरुओं ने उस समय के रोमन गवर्नर पिलातुस से यीशु की शिकायत कर दी। रोमन साम्राज्य हमेशा इस बात से डरते थे कि कहीं यहूदी क्रांति न कर दें। इसी के चलते यीशु को क्रॉस पर लटकाकर जान से मारने का आदेश दे दिया गया।
दी गई थी कठोर यातनाएं
गुड फ्राइडे के दिन प्रभु ईसा को सूली पर लटकाए जाने से पहले उन्हें तमाम तरह की यातनाएं दी। उनके सिर पर कांटो का ताज पहनाया गया। फिर सूली को कंधों पर उठाकर ले जाने को कहा गया इस दौरान उन पर लगातार चाबुक बरसाए गए। फिर बेरहमी से कीलों से उनको सूली पर लटका दिया गया। कहते है कि करीब 6 घंटे वह सूली पर लटके रहे। बाइबिल के अनुसार जब प्रभु ईसा अपने प्राण त्याग रहे थे तो उन्होंने ईश्वर को पुकारकर कहा कि हे पिता मैं अपनी आत्मा को तुम्हारे हाथों को सौंपता हूं। फिर उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इस दिन गिरजाघरों में ईसाई धर्म को मनाने वाले लोग सभी को ईसा मसीह की तरह इंसान से प्रेम और उनके अपराधों को माफ करने का संदेश देते हैं।
दोबारा जीवित होकर 40 दिन का दिया उपदेश
ऐसी मान्यता कि गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी संडे को ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे। जिसे ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे कहते हैं। ईसा मसीह अपने शिष्यों के लिए वापस आए थे और 40 दिनों तक उनके बीच जाकर उपदेश देते रहे। ईस्टर संडे के दिन लोग चर्च में जमा होते हैं और प्रभु यीशु को याद करते हैं। ईसा मसीह के जी उठने की खुशी में लोग प्रभु भोज में भाग लेते हैं। ईस्टर की आराधना प्रातःकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था इसे सनराइज सर्विस कहते हैं।
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