{"_id":"66e81de523e813be66003581","slug":"ganesh-visarjan-muhurat-timing-2024-pujan-vidhi-and-katha-2024-09-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ganesh Visarjan 2024: अनंत चतुर्दशी के दिन क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, जानें मुहूर्त और पूजा विधि","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Ganesh Visarjan 2024: अनंत चतुर्दशी के दिन क्यों किया जाता है गणेश विसर्जन, जानें मुहूर्त और पूजा विधि
Tue, 17 Sep 2024 07:26 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 17 Sep 2024 07:26 AM IST
सार
Ganesh Visarjan 2024 Muhurat: शास्त्रों में भगवान गणेश को विध्नहर्ता और सुख-समृद्धि का देवता माना जाता है। अनंत चतुर्दशी पर 10 दिनों तक चलने वाले पर्व गणेश उत्सव का आखिरी दिन होता है और इस दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।
विज्ञापन
Ganesh Visarjan 2024 Muhurat
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Ganesh Visarjan 2024 Muhurat: 17 सितंबर को अनंत चतुर्दशी है और इस दिन 10 दिनों तक चलने वाले पर्व गणेश उत्सव का आखिरी दिन भी है। अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन किया जाता है। 7 सितंबर को गणेश चतुर्थी तिथि से शुरू हुआ गणेश उत्सव अब 17 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ ही बप्पा की विदाई होगी। शास्त्रों में भगवान गणेश को विध्नहर्ता और सुख-समृद्धि का देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ गणेशजी की मूर्ति को अपने घर लाकर उनकी स्थापना करते हैं और पूरी श्रद्धा व भक्ति-भाव से उनका पूजन करते हैं। 10 दिनों तक गणेशोत्सव का यह पर्व चलता है, इसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन 'गणपति वप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ' इसी भावना के साथ गणपति की मूर्ति का विसर्जन कर दिया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश जी मूर्ति का विसर्जन क्यों किया जाता है, क्या है इसके पीछे कथा और गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
गणेश विसर्जन मुहूर्त 2024
प्रात:काल मुहूर्त (चर, लाभ,अमृत)- सुबह 09.11- दोपहर 01.47
अपराह्र मुहूर्त( शुभ)- दोपहर 03.19- शाम 04.51
सांय मुहूर्त ( लाभ)- रात 07.51 से 09.19
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- रात 10.47 से 18 सितंबर सुबह 03.12 तक
अभिजीत मुहूर्त- 11:50 से 12:39
गणेश विसर्जन पूजा विधि
अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन से पहले बप्पा की विधि-विधान के साथ पूजा करें, इनकी पूजा में गणेश जी को चंदन, हल्दी, मोदक, पुष्प और दुर्वा अर्पित करते हुए आरती करें। फिर इसके बाद बप्पा का आशीर्वाद लेते हुए उनकी विदाई करते हुए गणपति की मूर्ति के आकार का कोई टब लें और उसमें पानी भरकर उसमें गणपति को विसर्जित करे दें। इसके बाद पानी में बप्पा की मूर्ति पूरी तरह के धुल जाए तो इस पानी को किसी पवित्र नदी या फिर घर पर गमले में डाल दें। आप बप्पा की मूर्ति की मिट्टी में किसी पौधे का बीज लगा सकते हैं।
गणेश विसर्जन की पौराणिक कथा
गणपति बप्पा की मूर्ति को दस दिन बाद जल में विसर्जित करने के पीछे की मुख्य वजह महाभारत और महर्षि वेदव्यास से जुड़ी है। दरअसल, महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश से इसे लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की थी। भगवान गणेश ने उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार किया था और महाभारत लेखन का कार्य गणेश चतुर्थी के दिन से ही शुरू किया गया था।
विज्ञापन
लेकिन भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास की प्रार्थना को स्वीकार्य कर लिया, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी थी 'कि मैं जब लिखना प्रारंभ करूंगा तो कलम को रोकूंगा नहीं, यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा'।
तब वेदव्यासजी ने कहा कि भगवन आप देवताओं में अग्रणी हैं,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और मैं एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे त्रुटि हो जाय तो आप उस श्लोक को ठीक कर उसे लिपिबद्ध करें।
गणपति जी ने सहमति दी और फिर दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। जिसके बाद महाभारत लेखन का कार्य शुरू हुआ। इसे पूरा होने में करीबन 10 दिन लग गए।
जिस दिन गणेश जी ने महाभारत लेखन का कार्य पूरा किया, उस दिन अनंत चतुर्दशी थी। लेकिन लगातार दस दिनों तक बिना रूके लिखने के कारण भगवान गणेश का शरीर जड़वत हो चुका था। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा। वेदव्यास ने देखा कि, गणपति का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। यही कारण है कि गणपति स्थापना 10 दिन के लिए की जाती है और फिर 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।
विज्ञापन
गणेश विसर्जन मुहूर्त 2024
प्रात:काल मुहूर्त (चर, लाभ,अमृत)- सुबह 09.11- दोपहर 01.47
अपराह्र मुहूर्त( शुभ)- दोपहर 03.19- शाम 04.51
सांय मुहूर्त ( लाभ)- रात 07.51 से 09.19
रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- रात 10.47 से 18 सितंबर सुबह 03.12 तक
अभिजीत मुहूर्त- 11:50 से 12:39
गणेश विसर्जन पूजा विधि
अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन से पहले बप्पा की विधि-विधान के साथ पूजा करें, इनकी पूजा में गणेश जी को चंदन, हल्दी, मोदक, पुष्प और दुर्वा अर्पित करते हुए आरती करें। फिर इसके बाद बप्पा का आशीर्वाद लेते हुए उनकी विदाई करते हुए गणपति की मूर्ति के आकार का कोई टब लें और उसमें पानी भरकर उसमें गणपति को विसर्जित करे दें। इसके बाद पानी में बप्पा की मूर्ति पूरी तरह के धुल जाए तो इस पानी को किसी पवित्र नदी या फिर घर पर गमले में डाल दें। आप बप्पा की मूर्ति की मिट्टी में किसी पौधे का बीज लगा सकते हैं।
विज्ञापन
गणेश विसर्जन की पौराणिक कथा
गणपति बप्पा की मूर्ति को दस दिन बाद जल में विसर्जित करने के पीछे की मुख्य वजह महाभारत और महर्षि वेदव्यास से जुड़ी है। दरअसल, महाभारत के रचयिता महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश से इसे लिपिबद्ध करने की प्रार्थना की थी। भगवान गणेश ने उनकी इस प्रार्थना को स्वीकार किया था और महाभारत लेखन का कार्य गणेश चतुर्थी के दिन से ही शुरू किया गया था।
विज्ञापन
लेकिन भगवान गणेश ने महर्षि वेदव्यास की प्रार्थना को स्वीकार्य कर लिया, लेकिन उन्होंने एक शर्त रखी थी 'कि मैं जब लिखना प्रारंभ करूंगा तो कलम को रोकूंगा नहीं, यदि कलम रुक गई तो लिखना बंद कर दूंगा'।
तब वेदव्यासजी ने कहा कि भगवन आप देवताओं में अग्रणी हैं,विद्या और बुद्धि के दाता हैं और मैं एक साधारण ऋषि हूं। यदि किसी श्लोक में मुझसे त्रुटि हो जाय तो आप उस श्लोक को ठीक कर उसे लिपिबद्ध करें।
गणपति जी ने सहमति दी और फिर दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपति जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। जिसके बाद महाभारत लेखन का कार्य शुरू हुआ। इसे पूरा होने में करीबन 10 दिन लग गए।
जिस दिन गणेश जी ने महाभारत लेखन का कार्य पूरा किया, उस दिन अनंत चतुर्दशी थी। लेकिन लगातार दस दिनों तक बिना रूके लिखने के कारण भगवान गणेश का शरीर जड़वत हो चुका था। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पार्थिव गणेश भी पड़ा। वेदव्यास ने देखा कि, गणपति का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। यही कारण है कि गणपति स्थापना 10 दिन के लिए की जाती है और फिर 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं।