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गणेश चतुर्थी 2018 : आखिर चतुर्थी को ही क्यों किया जाता है गणों के स्वामी का महाव्रत

Mon, 10 Sep 2018 01:02 PM IST
पं. दीपक मालवीय, ज्योतिषविद
पं. दीपक मालवीय, ज्योतिषविद Updated Mon, 10 Sep 2018 01:02 PM IST
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ganesh mahotsav 2018 why this festival celebrate on ganesh chaturthi
ganesh chaturthi 2018

गणपति की विधिवत स्थापना और पूजा-अर्चना करने से ही सारे दुखों का हरण और जीवन मंगलमय होता है। सिद्धिविनायक श्री गणेश चतुर्थी का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इसी दिन मध्याह्न काल में श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। इसलिए मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी तिथि को यह व्रत किया जाता है। गणेशोत्सव का प्रसिद्ध महापर्व इस साल श्री गणेश चतुर्थी १३ सितम्बर 2018 गुरुवार से प्रारम्भ होकर २३ सितम्बर 2018 रविवार को गणपति विसर्जन के साथ समाप्त होगा।

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गणपति पूजन का महत्व
भगवान गणेश हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में माने जाते हैं। गणेश का शाब्दिक अर्थ है गणों का स्वामी। मानव शरीर ५ कर्मेन्द्रियों, ५ ज्ञानेन्द्रियों और ४ अंत:करण द्वारा संचालित होता है और इसके संचालित होने के पीछे जो शक्ति है, व विभिन्न १४ देवताओं की शक्ति हैं, जिनकी मूल प्रेरणा स्रोत है भगवान गणपति। प्रत्येक कार्य में ऋद्धि-सिद्धि, सफलता प्रदान करने व विघ्नों का नाश करना इनकी विशेषता है। यह बुद्धि के विशेष प्रतिनिधि है। भगवान महादेव के पुत्र होने के नाते इनका महत्व और भी बढ गया है। कोई भी मांगलिक कार्य बिना गणपति की पूजा के प्रारम्भ नहीं होता। इतना ही नहीं प्रत्येक देवी-देवताओं की साधना-अराधना करने से पूर्व भगवान गणपति से ही प्रार्थना की जाती है कि वे मेरी साधना पूर्ण होने में सहायक बनें ।
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चतुर्थी को ही क्यों गणपति का व्रत
श्री गणेश जी की साधना-अराधना के लिए चतुर्थी के दिन ही यह व्रत करने के पीछे भी विशेष कारण है। ज्योतिष शास्त्र में जैसे सूर्य आदि वारों का सूर्य आदि ग्रहों के पिण्डों के साथ विशेष सम्बन्ध स्थापित किया गया है और इसी आशय से उक्त वारों के नाम भी वैसे रखे गये हैं, इसी प्रकार प्रतिपदा आदि १५ तिथियों का भी भगवान की अंगभूत किसी न किसी देवी शक्ति के साथ विशेष सम्बन्ध हैं, यह तथ्य तिथियों के अधिष्ठाता के रूप में प्रगट किया गया है ।
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तिथीशा वह्निकौ गौरी गणेशोऽहिर्गमुहो रवि ।
वसुदुर्गान्तको विश्वे हरि: काम: शिव: शशि ।।


अर्थात् प्रतिपदा आदि तिथियों के अधिष्ठाता क्रमश: ये हैं -  १. अग्नि, २. ब्रह्मा, ३. गौरी, ४. गणेश, ५. सर्प, ६. र्कािर्तकेय, ७. सूर्य, ८. वसु, ९. दुर्गा, १०. काल, ११. विश्वेदेवा, १२. विष्णु, १३. कामदेव, १४. शिव और १५. चन्द्रमा। उपर्युक्त प्रमाण से यह सिद्ध है कि चतुर्थी तिथि का अधिष्ठाता भगवान का सर्वविघ्न हरण करने वाला `गणेश’ नामक सगुण विग्रह है। श्री गणेश जी के जन्मोत्सव के साथ इस चतुर्थी तिथि का पूर्ण सम्बन्ध है।

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