धनतेरस 2018: अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे भगवान धन्वंतरि
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धनतेरस (त्रयोदशी तिथि) को कई लोग धन संपत्ति से जोड़ते हैं, लेकिन वास्तव में यह पर्व स्वास्थ्य, उपचार और औषधि के देवता धन्वंतरि का स्मरण करने के लिए मनाया जाता है। एक कथा अनुसार, इस दिन सागर मंथन के दौरान धन्वंतरि अमृत घट लेकर प्रकट हुए थे। धन्वंतरि के स्वास्थ्य दर्शन के मुताबिक, मानव देह की प्रत्येक कोशिका अपने आप में एक संसार है। काया एक ऐसा संगठन है, जो प्रकृति की शक्तियों के संतुलन में ढला रहता है। प्रकृति के साथ तालमेल के बिना हम कभी स्वस्थ नहीं रह सकते हैं। धन्वंतरि का आयुर्वेद वह विज्ञान है, जो जीवन के लिए हितकारी और अहितकारी, पथ्य और अपथ्य, जीवन जीने की शैली, रोगों से बचाव के तरीके और रोगों के उपचार के उपायों का ज्ञान कराता है। आप यह जानकर ताज्जुब किए बिना नहीं रह सकेंगे कि कैसे कोई आयु के आधार पर शरीर के एक-एक अवयव की स्वस्थ और अस्वस्थ माप बता सकता है। लेकिन, यह चमत्कार धन्वंतरि ऋषि ने कर दिखाया था।
धन्वंतरि ऋषि ने विश्व भर की वनस्पतियों पर अध्ययन कर उनके अच्छे और बुरे प्रभावों को प्रकट किया। धन्वंतरि संहिता आयुर्वेद का मूल ग्रंथ माना जाता है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत मुनि ने ऋषि धन्वंतरि से ही इस शास्त्र का उपदेश हासिल किया था। परंपराओं की बात करें, तो वैद्यगण इस दिन धन्वंतरि ऋषि का पूजन करते हैं। वर मांगते हैं कि उनकी औषधि-उपचार में ऐसी शक्ति आ जाए, जिससे रोगी को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ हो। गृहस्थ लोग अमृत पात्र का स्मरण करते हुए घरों में नए बर्तन लाकर धनतेरस मनाते हैं और उनमें पकवान रखकर भगवान को भोग अर्पित करते हैं। यह पर्व विशेष रूप से स्वास्थ्य, धन और समृद्धि से संबंधित है। इस दिन लोग धन-संपत्ति की प्रदाता देवी लक्ष्मी औरधन-संपत्ति के कोषाध्यक्ष कुबेर देवता की पूजा करते हैं।