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Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि में घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं मां और वापसी हाथी पर, जानिए ऐसा क्यों?
Sat, 10 Apr 2021 07:21 AM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 10 Apr 2021 07:21 AM IST
सार
- मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो माँ का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता है।
- कलश स्थापना सुबह 10 बजकर 15 मिनट से पहले कर लेना अधिक शुभ रहेगा,
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Happy Navratri 2021
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विक्रम संवत् 2078 चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा, मंगलवार के दिन 'रूद्र विंशति' का राक्षस नामक संवत्सर शक्ति आराधना के साथ आरम्भ हो रहा है। इस दिन अतिपुण्य फल देने वाली अश्विनी नक्षत्र विराजमान रहेगी। चन्द्र भी मेष राशि पर गोचर कर रहे होंगे। रात्रि में सूर्य भी मेष राशि पर ही आ जायेंगे जिसके फलस्वरूप नवरात्रि की शुभता में और वृद्धि हो जायेगी। इस दिन मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं जिसके
परिणामस्वरूप कई तरह के राजनैतिक परिवर्तन हो सकते हैं। उच्चाधिकारियों के स्थान परिवर्तन की भी होड़ सी लग जायेगी।
कलश स्थापना सुबह 10 बजकर 15 मिनट से पहले कर लेना अधिक शुभ रहेगा, क्योंकि उसके बाद द्वितीया तिथि लग जायेगी। मां के जो भक्त इस समय के मध्य कलशस्थापन न कर पाएं वे दोपहर को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट के मध्य कर सकते हैं। पहले कलश स्थापन व्रत संकल्प आदि कर लेना अति शुभ रहेगा।
मंगलवार के दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा होने से मां दुर्गा का वाहन अश्व ही होगा विगत वर्ष शारदीय नवरात्रि में भी मां दुर्गा का वाहन अश्व ही था। मेष राशि पूर्व दिशा की स्वामिनी है अतः पूर्व के देशों में प्राकृतिक आपदा, अग्निकांड, आंधी-तूफ़ान, साम्प्रदायिकता और आतंकवाद जैसे घटनाओं का बोलबाला रहेगा। आपसी युद्ध और दो राष्ट्रों में भी युद्धोन्माद भड़केगा। तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा बराबर बना रहेगा। जनता पर बेरोजगारी तथा महंगाई का बोझ और बढेगा।
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शास्त्रानुसार मां प्रत्येक नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर अपने भक्तों को वरदान देने आती हैं उनके वाहन के अनुसार ही मेदिनी ज्योतिष के फलित का विश्लेषण किया जाता है।
शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे । गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता' ।
गजे च जलदा देवी छत्र भंगस्तुरंगमे । नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम् ।
अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी है जो अत्यंत जल की वृष्टि कराने वाला संकेत होता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो माँ का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता है जो राजा अथवा सरकार के परिवर्तन का संकेत देता है।
गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि का प्रथम दिन पड़े तो मां का आगमन डोली में होता है जो जन-धन की हानि, तांडव, रक्तपात होना बताता है। यदि नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार हो तो माँ दुर्गा 'नौका' पर विराजमान होकर आती हैं और अपने सभी भक्तों को अभीष्ट सिद्धि देती है।
इस प्रकार वर्तमान 13 अप्रैल मंगलवार से आरंभ होने वाले नवरात्रि के दिन मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आ रही हैं जो भक्ति की कठिन परीक्षा लेने वाली हैं। मां दुर्गा वापसी में हाथी की सवारी करके जायेंगी ।
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा । शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करीविकला ।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभवृष्टिकरा । सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा ।।
अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का समापन हो तो माँ भैंसा की सवारी से जाती हैं जिससे देश में रोग और शोक बढ़ता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का समापन हो तो माँ मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जो दुख और कष्ट की वृद्धि करता है।
बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि का समापन होने पर मां की वापसी हाथी पर होती है जो अति वृष्टि सूचक है। गुरुवार को नवरात्रि समापन होने पर मां भगवती मनुष्य के ऊपर सवार होकर जाती हैं जो सुख और शांति की वृद्धि होती है। इस प्रकार मां के आने का वाहन अशुभ संकेत दे रहा है जबकि जाने का शुभाशुभ दोनों है ।
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परिणामस्वरूप कई तरह के राजनैतिक परिवर्तन हो सकते हैं। उच्चाधिकारियों के स्थान परिवर्तन की भी होड़ सी लग जायेगी।
कलश स्थापना सुबह 10 बजकर 15 मिनट से पहले कर लेना अधिक शुभ रहेगा, क्योंकि उसके बाद द्वितीया तिथि लग जायेगी। मां के जो भक्त इस समय के मध्य कलशस्थापन न कर पाएं वे दोपहर को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट के मध्य कर सकते हैं। पहले कलश स्थापन व्रत संकल्प आदि कर लेना अति शुभ रहेगा।
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मंगलवार के दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा होने से मां दुर्गा का वाहन अश्व ही होगा विगत वर्ष शारदीय नवरात्रि में भी मां दुर्गा का वाहन अश्व ही था। मेष राशि पूर्व दिशा की स्वामिनी है अतः पूर्व के देशों में प्राकृतिक आपदा, अग्निकांड, आंधी-तूफ़ान, साम्प्रदायिकता और आतंकवाद जैसे घटनाओं का बोलबाला रहेगा। आपसी युद्ध और दो राष्ट्रों में भी युद्धोन्माद भड़केगा। तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा बराबर बना रहेगा। जनता पर बेरोजगारी तथा महंगाई का बोझ और बढेगा।
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शास्त्रानुसार मां प्रत्येक नवरात्रि पर्व के प्रथम दिन अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर अपने भक्तों को वरदान देने आती हैं उनके वाहन के अनुसार ही मेदिनी ज्योतिष के फलित का विश्लेषण किया जाता है।
शशि सूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे । गुरौ शुक्रे च डोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता' ।
गजे च जलदा देवी छत्र भंगस्तुरंगमे । नौकायां सर्वसिद्धि स्यात डोलायां मरण ध्रुवम् ।
अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो मां दुर्गा का वाहन हाथी है जो अत्यंत जल की वृष्टि कराने वाला संकेत होता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का शुभारंभ हो तो माँ का आगमन घोड़ा (तुरंग) पर होता है जो राजा अथवा सरकार के परिवर्तन का संकेत देता है।
गुरुवार और शुक्रवार को नवरात्रि का प्रथम दिन पड़े तो मां का आगमन डोली में होता है जो जन-धन की हानि, तांडव, रक्तपात होना बताता है। यदि नवरात्रि का शुभारंभ बुधवार हो तो माँ दुर्गा 'नौका' पर विराजमान होकर आती हैं और अपने सभी भक्तों को अभीष्ट सिद्धि देती है।
इस प्रकार वर्तमान 13 अप्रैल मंगलवार से आरंभ होने वाले नवरात्रि के दिन मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर अपने भक्तों के घर आ रही हैं जो भक्ति की कठिन परीक्षा लेने वाली हैं। मां दुर्गा वापसी में हाथी की सवारी करके जायेंगी ।
शशि सूर्य दिने यदि सा विजया महिषागमने रुजशोककरा । शनि भौमदिने यदि सा विजया चरणायुध यानि करीविकला ।।
बुधशुक्र दिने यदि सा विजया गजवाहन गा शुभवृष्टिकरा । सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहन गा शुभ सौख्य करा ।।
अर्थात-
रविवार और सोमवार को नवरात्रि का समापन हो तो माँ भैंसा की सवारी से जाती हैं जिससे देश में रोग और शोक बढ़ता है।
शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का समापन हो तो माँ मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं, जो दुख और कष्ट की वृद्धि करता है।
बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि का समापन होने पर मां की वापसी हाथी पर होती है जो अति वृष्टि सूचक है। गुरुवार को नवरात्रि समापन होने पर मां भगवती मनुष्य के ऊपर सवार होकर जाती हैं जो सुख और शांति की वृद्धि होती है। इस प्रकार मां के आने का वाहन अशुभ संकेत दे रहा है जबकि जाने का शुभाशुभ दोनों है ।