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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Bhadli Navami 2021 Date Last Marriage Shubh Muhurat Before God Sleeps

Bhadli Navami 2021: 18 जुलाई को भड़ली नवमी पर होंगे शुभ विवाह, जानिए इसका महत्व

Fri, 16 Jul 2021 06:16 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 16 Jul 2021 06:16 AM IST
सार

  • 18 जुलाई को भड़ली नवमी है और इस दिन आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि का आखिरी दिन भी है।
  • भड़ली नवमी एक अबूझ मुहूर्त है। जिसमें बिना शुभ मुहूर्त के विवाह संपन्न किए जा सकते हैं।

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Bhadli Navami 2021 Date Last Marriage Shubh Muhurat Before God Sleeps
भड़ली नवमी 2021 :हिंदू पंचांग के अनुसार 18 जुलाई को नवमी तिथि सुबह 02 बजकर 41 मिनट से आरंभ हो जाएगी - फोटो : istock

विस्तार

शास्त्रों के अनुसार कुछ तिथियां बहुत ही खास होती हैं जिसे अबूझ  मुहूर्त कहा जाता है। अबूझ मुहूर्त में सभी तरह के कार्य बिना शुभ मुहूर्त देखें संपन्न किए जा सकते हैं। भड़ली नवमी अबूझ मुहूर्तों में से एक है जिसका महत्व अक्षय तृतीया के समान है। प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल नवमी को भड़ली नवमी का त्योहार मनाया जाता है। 18 जुलाई को भड़ली नवमी है और इस दिन आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्रि का आखिरी दिन भी है। विवाह जैसे मांगलिक कार्यो के लिए भड़ली नवमी का दिन विशेष माना गया है। इस तिथि पर बिना मुहूर्त देखें विवाह जैसे शुभ अनुष्ठान संपन्न किया जा सकता है। 18 जुलाई को भड़ली नवमी है और इसके बाद 20 जुलाई 2021 को देवशयनी एकादशी होने के कारण आने वाले चार महीनों के लिए विवाह कार्य थम जाएंगे। पंचांग की गणना के आधार पर इस जुलाई महीने में विवाह के लिए केवल पांच ही शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। 1, 2, 6 और 16 जुलाई को ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त हैं, लेकिन 18 जुलाई को अबूझ मुहूर्त भड़ली नवमी होने के कारण शुभ विवाह संपन्न किए जा सकते हैं।

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चातुर्मास- चार महीनों तक नहीं होंगे कोई भी शुभ आयोजन
20 जुलाई से चातुर्मास आरंभ हो जाएगा। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान क्षीर सागर में योगनिद्रा के लिए प्रस्थान कर देते हैं। श्री विष्णु के पास इस संसार के पालन का जिम्मा है और वो अपनी माया के माध्यम से इस संसार का संचालन करते हैं, लेकिन चार महीने के लिए श्रीविष्णु योग निंद्रा में चले जाते है। दरअसल धर्म ग्रन्थों की माने तो आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक की अवधि को चार्तुमास कहा जाता है और इन चार महीनों में श्री विष्णु निंद्रा में चले जाते हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन से देवताओं की रात शुरू होती है। इसके अलावा कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है और उसके बाद मांगलिक कार्य शुरू होते है। इन चार महीनों में जितने भी मांगलिक कार्य है वो सब निषेध होते हैं।
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भड़ली नवमी शुभ मुहूर्त 2021
हिंदू पंचांग के अनुसार 18 जुलाई को नवमी तिथि सुबह 02 बजकर 41 मिनट से आरंभ हो जाएगी जो देर रात 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। खास बात यह है कि 18 जुलाई को भड़ली नवमी के दिन रवि योग साध्य योग भी बनेगा।

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