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Baisakhi 2020: बैसाखी आज, इसी दिन रखी गई थी खालसा पंथ की नींव

Mon, 13 Apr 2020 07:35 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 13 Apr 2020 07:35 AM IST
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Baisakhi 2020 happy baisakhi wishes date significance and history
बैसाखी 2020 - फोटो : अमर उजाला
बैसाखी का त्योहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के किसान अपनी रबी की फसलें तैयार होने की खुशी में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाई जाती है। बैसाखी के दिन पकी हुई फसलों को प्रतीक स्वरूप अग्नि देव को समर्पित कर बैसाखी का पर्व मनाया जाता है। बैसाखी का त्योहार न सिर्फ फसलों के पक जाने की खुशी में मनाया जाता है बल्कि कई अन्य कारणों से भी इसका महत्व है। बैसाखी का दिन ज्योतिष के लिहाज से भी महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। बैसाखी के ही दिन सूर्य मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस दिन मेष संक्रांति भी मनाई जाती है। बैसाखी के ही दिन सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह ने साल 1699 में आनंद साहिब में मुगलों के अत्याचारों का मुकाबला करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की थी। यह पर्व न सिर्फ पंजाब और हरियाणा में मनाया जाता है बल्कि देश के अन्य हिस्सों में अलग-अलग नामों से भी मनाया जाता है।
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बैसाखी के दिन पड़ी थी खालसा पंथ की नींव
साल 1699 में सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गोबिंद सिंह ने आनंद साहिब में मुगलों के आक्रमण और अत्याचारों से मुकाबला करने के लिए खालसा पंथ की स्थापना की थी। ऐसे में बैसाखी के दिन पवित्र गुरुद्वारों में कई तरह के धार्मिक आयोजन और कीर्तन किया जाता है।
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मेष संक्रांति
इसी दिन सभी ग्रहों के राजा सूर्यदेव मीन राशि की अपनी यात्रा को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है। ऐसे में बैसाखी के दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है।
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कई राज्यों में बैसाखी के अलग नाम
पंजाब में जहां इस पर्व को बैसाखी के नाम से जाना जाता है वहीं असम में इसे बिहू के नाम से भी जाना जाता है। पश्चिम बंगाल में इसे पोइला बैसाख के नाम से और केरल में इसे विशु नाम से जाना जाता है।
 
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