Apara Ekadashi Vrat : जानें किन पांच गलतियों के कारण नहीं मिलता अपरा एकादशी व्रत का फल
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1. नहीं खाएं चावल
एकादशी पर भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार एकादशी में चावल का सेवन करने से मन में चंचलता आती है, जिसके कारण मन भटकता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है।
जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।
2. न करें किसी भी प्रकार का नशा
एकादशी का व्रत रखने वाले साधक को इस पावन तिथि पर किसी भी प्रकार की नशीली चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन न सिर्फ व्रती बल्कि उसके परिवार में रहने वाले सदस्यों को भांग, धूम्रपान और मदिरा आदि का सेवन करने से बचना चाहिए।
3. न करें किसी पर क्रोध
किसी भी व्रत या पूजा को शांत चित्त मन और भक्ति भाव के साथ करने पर वह सफल होती है। ऐसे में जिस दिन एकादशी का व्रत रखा हो, उस दिन भूलकर भी मनुष्य को क्रोध नहीं करना चाहिए। अपरा एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को तनाव से बचना चाहिए, क्योंकि क्रोध और तनाव से मन में नकारात्मक विचार आते हैं, जिसके कारण पूजा में ठीक तरह से मन नहीं लगता।
4. दातुन करना है वर्जित
एकादशी के व्रत में कभी भी दातुन से दांत साफ नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि एकादशी वाले दिन किसी पेड़ की टहनियों को तोड़ने से भगवान विष्णु नाराज हो जाते हैं।