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सफला एकादशी : श्रीहरि के व्रत से हुई साल 2019 की शुरुआत, सफलता के लिए रखें इन बातों का विशेष ध्यान

Tue, 01 Jan 2019 08:58 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Tue, 01 Jan 2019 08:58 AM IST
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2019 starting with safla ekadashi vrat importance
Safla Ekadashi Vrat 2019

नये साल 2019 की शुरुआत पावन तिथि एकादशी से हो रही है। भगवान विष्णु की साधना-आराधना के लिए समर्पित एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। पौष मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन किया जाने वाला यह व्रत जीवन में सफलता पाने और मनोकामना को पूरा करने के लिए विशेष रूप से किया जाता है। 

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Safla Ekadashi Vrat 2019

श्री हरि के कृपा से सफल होगी साधना

सफला एकादशी व्रत के पूजनीय देवता श्रीहरि हैं। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति विधि-विधान से भगवान विष्णु की साधना करते हुए एकादशी का व्रत और रात्रि जागरण करता है, उसे वर्षों की तपस्या का पुण्य प्राप्त होता है। पूर्ण श्रद्धा भाव से पूजन करने वाले साधक के व्रत से प्रसन्न होकर देवाधिदेव भगवान विष्णु उसकी सभी मनोकामना  पूर्ण करते हैं। उसके दु:खों को दूर करते हुए उसे प्रत्येक क्षेत्र में सफलता दिलाते हैं। भगवान विष्णु की कृपा पाकर साधक सभी सुखों को भोगता हुआ मोक्ष प्राप्त करता है। 

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Safla Ekadashi Vrat 2019

सफला एकादशी की कथा

पद्म पुराण की कथा के अनुसार महिष्मान नाम का एक राजा था। जिसका ज्येष्ठ पुत्र लुम्पक पाप कर्मों में अक्सर लिप्त रहता था। इससे क्रोधित होकर राजा महिष्मान ने अपने पुत्र को देश से बाहर निकाल दिया। इसके पश्चात्लु लुम्पक जंगल में रहने लगा।

एक बार लुम्पक पौष कृष्ण दशमी की रात में अत्यधिक ठंड के कारण वह सो न सका और सुबह होते होते ठंड के चलते बेहोश हो गया। आधा दिन बीतने के पश्चात् जब उसकी बेहोशी दूर हुई, तब वह जंगल से फल इकट्ठा करने लगा। सूर्यास्त के बाद वह अपनी किस्मत को कोसते हुए भगवान को याद करने लगा। एकादशी की रात भी अपने दुःखों पर विचार करते हुए लुम्पक सो न सका।

इस तरह अनजाने में ही लुम्पक से सफला एकादशी का व्रत पूरा हो गया। इस व्रत के प्रभाव से लुम्पक सुधर गया और उसके पिता महिष्मान ने उसे अपना सारा राज्य सौंप दिया और खुद तपस्या के लिए चले गये। धर्मपथ पर चलते हुए लुंपक ने कई वर्षों तक शासन किया और उसके पश्चात् वह भी तपस्या करने चला गया और मृत्यु के पश्चात उसे विष्णुलोक में स्थान प्राप्त हुआ।

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यदि व्रत करने में असमर्थ हैं तो...
यदि आप किसी बीमारी या किसी अन्य कारणवश व्रत को करने में असमर्थ हैं तो आप इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा अवश्य करें। दैनिक कार्य करते हुए श्रीहरि का स्मरण करें। साथ ही एकादशी वाले दिन चावल से बना भोजन, लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा आदि तामसिक चीजों का सेवन न करें। 

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