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स्मार्ट बेटियां: मुस्कुराती रहेगी प्रेमा, जारी रहेगी उसकी इंटर की पढ़ाई

Wed, 07 Nov 2018 05:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Nov 2018 05:33 PM IST
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Smart daughters: Smile will continue to love Premma, her inter-schooling will continue
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सात लोगों का परिवार और गुजारे के लिए एक छोटी सी दुकान। तीन बेटियां, दो बेटे और खुद पति-पत्नी। परंपरा तो यह कहती थी कि लड़की सोलह की हो चुकी है, अब उसके हाथ पीले कर दो। लेकिन दिल ने कहा कि नहीं, बिटिया के साथ अन्याय हो जाएगा। खिलने से पहले की उसकी जिंदगी मुरझा जाएगी। इसलिए रमाकांत मौर्य ने अपने परिवार और रिश्तेदारों के बीच घोषणा कर दी कि जब तक बेटी की शिक्षा पूरी नहीं हो जाती तब तक उसका ब्याह नहीं होगा। यह सच्ची कहानी श्रावस्ती के इकौना ब्लॉक के गांव सलवरिया की है। अयोध्या प्रसाद के बेटे रमाकांत बताते हैं कि गांव के लोग और रिश्तेदार कह रहे थे कि बहुत पढ़ा लिखा कर क्या नौकरी करवानी है, शादी कर दो बिटिया की! लेकिन बड़ी बेटी प्रेमा अभी इंटर में ही पढ़ रही थी और उम्र भी उसकी बस 17 साल थी। एक बार तो रमाकांत का भी हौसला जवाब देने लगा था। लेकिन फिर उन्होंने गांव के कुछ समझदार और शिक्षित लोगों से बात की। उन्होंने यही राय दी कि जल्दबाजी घातक होगी। बिटिया को दो-तीन साल और पढ़ने दो। वैसे भी अठारह वर्ष से पहले शादी करना कानूनन अपराध है।
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रमाकांत का दिमाग़ अब बिलकुल साफ है। उन्हें पता है कि क्या करना है। प्रेमा के ब्याह की कोई जल्दी अब नहीं है। प्रेमा इंटर पास करेगी। उसके बाद आगे कॉलेज की भी तैयारी करेगी। जब तक बेटियों की तालीम जारी है, रमाकांत की उम्मीद के दिये भी जल रहे हैं। वे संतुष्ट हैं कि गृहस्थी सही राह पर है।
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अमर उजाला और यूनीसेफ के ` स्मार्ट बेटियां` अभियान के तहत इंटरनेट साथी पुष्पा देवी ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान `स्मार्ट बेटियां` के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
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