{"_id":"5bf93aeebdec2241c93700e8","slug":"smart-betiyan-story-of-radheshyam-every-10th-child-in-our-village-has-a-child-marriage","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्मार्ट बेटी: हमारे गांव में हर 10वें बच्चे का बाल विवाह होता है","category":{"title":"Smart Beti","title_hn":"स्मार्ट बेटी","slug":"smart-beti"}}
स्मार्ट बेटी: हमारे गांव में हर 10वें बच्चे का बाल विवाह होता है
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Nov 2018 05:20 PM IST
विज्ञापन
radhe shyam
- फोटो : अमर उजाला
राधेश्याम एक टीचर हैं और गांव के हालात को देखकर दुखी हैं। जब वे कक्षा में बच्चों को पढ़ाते हैं तो उन्हें पता होता है कि सामने बैठे हर दसवें बच्चे का कच्ची उम्र में ब्याह कर दिया जाएगा। लेकिन अपना दुख लेकर राधेश्याम बैठे नहीं रहते। उन्होंने गांव से बालविवाह को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया है और इसके लिए वे नियमित तौर पर परिवारों की काउंसिलिंग करते हैं।
राधेश्याम बाल विवाह की बहुत ऊंची दर के लिए चर्चित बलरामपुर जिले के गैसड़ी ब्लॉक के मुतेहरा गांव में रहते हैं। उनके तीन बच्चे हैं। बड़े दोनों बेटे अपने व्यापार में हैं। छोटी बेटी इंटर में पढ़ रही है। वे बताते हैं कि बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण गरीबी है। मां-बाप को लगता है कि बड़ी उम्र होने पर रिश्ता मुश्किल से मिलेगा और शादी में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। कई परिवार इसलिए बच्ची को जल्द विदा कर देते हैं कि घर के एक सदस्य का खर्चा कम होगा।
इन गलतफहमियों को देर करने का एक ही रास्ता है -- सलाह-मशविरा। धैर्य के साथ माता-पिता का ह्रदय परिवर्तन। वही राधेश्याम कर रहे हैं। यह संकल्प तो उनका है ही कि बेटी की शादी अठारह साल के बाद ही करेंगे।
विज्ञापन
अमर उजाला और यूनीसेफ के ` स्मार्ट बेटियां` अभियान के तहत इंटरनेट साथी सती अनुसूइया ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान `स्मार्ट बेटियां` के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।
विज्ञापन
राधेश्याम बाल विवाह की बहुत ऊंची दर के लिए चर्चित बलरामपुर जिले के गैसड़ी ब्लॉक के मुतेहरा गांव में रहते हैं। उनके तीन बच्चे हैं। बड़े दोनों बेटे अपने व्यापार में हैं। छोटी बेटी इंटर में पढ़ रही है। वे बताते हैं कि बाल विवाह का सबसे बड़ा कारण गरीबी है। मां-बाप को लगता है कि बड़ी उम्र होने पर रिश्ता मुश्किल से मिलेगा और शादी में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। कई परिवार इसलिए बच्ची को जल्द विदा कर देते हैं कि घर के एक सदस्य का खर्चा कम होगा।
विज्ञापन
इन गलतफहमियों को देर करने का एक ही रास्ता है -- सलाह-मशविरा। धैर्य के साथ माता-पिता का ह्रदय परिवर्तन। वही राधेश्याम कर रहे हैं। यह संकल्प तो उनका है ही कि बेटी की शादी अठारह साल के बाद ही करेंगे।
विज्ञापन
अमर उजाला और यूनीसेफ के ` स्मार्ट बेटियां` अभियान के तहत इंटरनेट साथी सती अनुसूइया ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।
अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा अभियान `स्मार्ट बेटियां` के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।