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ख्वाहिशों की कश्मकश में पारुल के साथ उसके पिता

Sat, 27 Oct 2018 02:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 27 Oct 2018 02:59 PM IST
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Desperate the wishes of Parul father's with her
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बचपन में ही मां के गुजर जाने के बाद पारुल को उसकी दादी ने पाला-पोसा। आज 15 साल की पारुल आगे पढ़ने की ख्वाहिशमंद है और दादी की जिद है कि उनके जिंदा रहते ही पारुल के हाथ पीले हो जाएं। शाहपुर बरगदवा गांव की पारुल डॉक्टर बनकर गांव वालों की सेवा करना चाहती है। ख्वाहिशों की इस कश्मकश में पिता कैलाश नाथ वर्मा पारुल के साथ खड़े हैं।

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इसी सहारे के दम पर पारुल दादी को समझाते हुए कह पाती है कि 30 साल की होकर और कुछ बनकर शादी करूंगी। बड़की मां की बेटी की शादी 15 साल में हो गई थी और पारुल की पड़ोसी लड़की की भी शादी 15 ही साल की उम्र में हो गई थी। उनकी दशा देखकर पारुल के मन में संकल्प पक्का हो चुका है कि कुछ बनकर शादी करेगी।
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स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी मालती देवी ने यह वीडियो कथा बनाई है।अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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