फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal: Closure of institute does not mean fraud, High Court rejects government's appeal

Himachal: संस्थान बंद होने का मतलब धोखाधड़ी नहीं, हाईकोर्ट में सरकार की अपील खारिज

Fri, 13 Mar 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 13 Mar 2026 06:00 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षण संस्थान छात्रों की कमी के कारण बंद हो जाता है, तो उसे धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। 

विज्ञापन
Himachal: Closure of institute does not mean fraud, High Court rejects government's appeal
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षण संस्थान छात्रों की कमी के कारण बंद हो जाता है, तो उसे धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत की ओर से आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि मामले में आपराधिक नीयत का अभाव है। आईपीसी की धारा 420 के लिए शुरुआत से ही बेईमानी की नीयत होना अनिवार्य है। इस मामले में आरोपी ने बिल्डिंग किराये पर ली थी, स्टाफ रखा था और बस सुविधा भी दी थी।

विज्ञापन
Trending Videos

मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता बयानों से मुकरे
मामले के मुख्य गवाह और शिकायतकर्ता बयानों से मुकर गए थे। शिकायतकर्ता ने अदालत में स्वीकार किया कि उसने संस्थान अपनी मर्जी से छोड़ा था और पुलिस ने उसके हस्ताक्षर खाली कागजों पर लिए थे। गवाहों के बयानों से स्पष्ट हुआ कि अधिकांश छात्रों का चयन भारतीय सेना में हो गया था, जिस कारण उन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। छात्रों की कमी की वजह से आरोपी को संस्थान बंद करने पर मजबूर होना पड़ा। कई छात्रों ने माना कि उन्होंने फीस पूरी जमा नहीं की थी और खुद ही संस्थान छोड़ दिया था। हाईकोर्ट ने प्रथम अपीलीय अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल संस्थान बंद होने से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने छात्रों को ठगने के लिए उसे खोला था। इसी के साथ कोर्ट ने आरोपी के बेल बॉन्ड रद्द करते हुए उसे सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह है मामला
यह मामला जिला बिलासपुर के घुमारवीं का है। आरोप था कि आरोपी ने वर्ष 1998 में एक तकनीकी संस्थान खोला, विज्ञापन देकर छात्रों से भारी-भरकम फीस वसूली, लेकिन कुछ समय बाद बिना कोर्स पूरा किए और बिना डिप्लोमा दिए संस्थान बंद कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 2008 में आरोपी को दोषी करार देते हुए दो साल के कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि 2011 में प्रथम अपीलीय अदालत ने इस फैसले को पलटते हुए उसे बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ प्रदेश सरकार हाईकोर्ट पहुंची थी।

विज्ञापन

आदेशों की अवहेलना पर इग्नू निदेशक और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रिंसिपल तलब
 प्रदेश हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2025 के अदालती आदेशों की अनुपालना न करने पर इग्नू के निदेशक जोगिंदर यादव और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली कॉलेज के प्रिंसिपल को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह कड़ा रुख अवमानना याचिका मदन शांडिल बनाम जोगिंदर यादव मामले में लिया है। न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की अदालत मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को करेगी। अदालत के पिछले आदेशों में कहा गया है कि याचिकाकर्ता (मदन शांडिल) पिछली चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता के आधार पर दूसरे स्थान पर थे। चयन प्रक्रिया में वरिष्ठता को हाईकोर्ट में चुनौती देने के बाद अदालत ने पहले स्थान पर रहे उम्मीदवार के अयोग्य घोषित करार देने के बाद याचिकाकर्ता को इस पद के लिए हकदार पाया, लेकिन प्रतिवादियों ने अदालती आदेशों को दरकिनार कर उन्हें नियुक्ति देने के बजाय नई विज्ञापन प्रक्रिया शुरू कर दी। प्रतिवादियों का तर्क था कि याचिकाकर्ता ने नए विज्ञापन (दिसंबर 2024) में भाग लेकर पुरानी प्रक्रिया को चुनौती देने का हक खो दिया है। अदालत ने इस तर्क को प्रतिवादियों द्वारा अपनी गलती छिपाने का एक तरीका माना।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed