फ्रांस में मिले दोनों करमापा, तिब्बती समुदाय हैरान
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तिब्बती बौद्ध धर्म की करमापा पदवी इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई है। इसी बीच करमापा पदवी से जुड़े एक और घटनाक्रम ने दुनियाभर के तिब्बती समुदाय को हैरान कर दिया है। तिब्बती बौद्ध धर्म में करमा काग्यू संप्रदाय के 17वें करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे (33) और इसी पद के दावेदार त्रिनले थाई दोरजे (35) ने फ्रांस में मुलाकात कर अपनी बातचीत का साझा बयान जारी किया है। उनकी अचानक मुलाकात ने दोनों बौद्ध धर्मगुुरुओं के समर्थकों को हैरान कर दिया है।
भारत ने 1994 में पूर्वी सिक्किम में स्थित रुमटेक मठ के करमापा के खिताब के लिए सभी दावेदारों की प्रविष्टि पर प्रतिबंध लगा दिया था। उग्येन त्रिनले दोरजे जनवरी 2000 में भारत भाग कर आए थे। उन्हें बैजनाथ मठ के प्रमुख ताई सितु रिपोंछे और दलाईलामा ने 17वें करमापा की मान्यता दी थी। इन्हें चीन सरकार का समर्थन भी मिला है।
कलीमपोंग के त्रिनले थाई दोरजे को शामर रिपोंछे ने करमापा की मान्यता दी थी। ऐसे में करमापा पदवी पर आपसी मतभेदों की वजह से वर्तमान में दो धर्मगुरु बैठे हुए हैं। अब फ्रांस में मुलाकात के बाद करमापा की आधिकारिक वेबसाइट में जारी साझा बयान में तिब्बती बौद्ध धर्म के करमा काग्यू वंश को संरक्षित करने के लिए मिलकर काम करने की बात कही।
उग्येन त्रिनले दोरजे और त्रिनले थाये दोरजे ने कहा कि कई वर्षोँ से हम दोनों की मुलाकात करने की इच्छा थी। अब हमारी इच्छा अब पूरी हो गई है। इस मुलाकात का मकसद आपस में व्यक्तिगत संबंध स्थापित करना और करमा काग्यू वंश को संरक्षित तथा मजबूत करना है। दोनों आध्यात्मिक गुरुओं ने कहा उन्होंने करमा काग्यू वंश में विकसित हुए विभाजन को खत्म के लिए काम करने के उपायों पर चर्चा की।
निर्वासित तिब्बत सरकार ने किया स्वागत
फ्रांस में दोनों धर्मगुरुओं की मुलाकात के बाद धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बत संसद में करमा काग्यू सेक्ट के प्रतिनिधि के तौर पर बतौर सांसद बने टेंपा यारफेल ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक बदलाव की संज्ञा दी। निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रवक्ता सोनम दोगपो ने कहा कि दोनों बौद्ध धर्मगुरुओं की मुलाकात का सरकार स्वागत करती है।
उग्येन त्रिनले दोरजे को करमापा के रूप में खुद दलाईलामा ने मान्यता दी है। इसलिए, तिब्बतियन उग्येन त्रिनले दोरजे को असली करमापा के रूप में मानते हैं।फिर भी उग्येन त्रिनले दोरजे किसी भी मतभेद को सुलझाना चाहते हैं तो इससे जरूर सकारात्मक लाभ मिलेगा।
सिक्किम में बौद्ध धर्म के लोग करीब 900 से ज्यादा वर्ष पुराने करमा काग्यू संप्रदाय के अनुयायी हैं। करमा काग्यू संप्रदाय तिब्बती बौद्ध धर्म के चार संप्रदायों में से एक है। इसके खिताब पर दो अलग दावेदारियों के चलते संप्रदाय भी बंट गया है।