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पौने दो लाख छात्रों को राहत, नहीं लगेगा फीस पर जीएसटी

Tue, 17 Apr 2018 01:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 17 Apr 2018 01:04 PM IST
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No GST on fee for universities and colleges

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध कॉलेजों के पौने दो लाख छात्रों को बड़ी राहत मिली है। उनसे वसूली जाने वाली फीस पर जीएसटी नहीं लगेगा। वर्ष 2017 से लागू जीएसटी एक्ट में फीस पर सर्विस टैक्स लिया जाएगा या नहीं, इस पर देश के अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ ही फैसला होगा।

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फिलहाल, फीस पर जीएसटी वसूली का मामला टल गया है। बता दें कि डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की ओर से एचपीयू को वर्ष 2012 से लेकर वसूली गई फीस और समस्त स्रोतों से हुई आय पर सर्विस टैक्स की देनदारी चुकाने को 25 जनवरी को नोटिस दिया था। विवि ने चंडीगढ़ स्थित डीजी कार्यालय में कंसलटेंट और रिकार्ड के साथ अपना पक्ष रखा, जिसमें यह फैसला हुआ है।
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वर्ष 2015 से फीस में की गई भारी-भरकम बढ़ोतरी के बाद छात्रों पर जीएसटी का बोझ फिलहाल नहीं पड़ेगा। इससे विवि में पढ़ने वाले करीब सवा लाख यूजी और 50 हजार पीजी कोर्स के छात्रों को राहत है। पक्ष रखने गए विवि के पूर्व कुलसचिव प्रो. एसएस नारटा, वित्त अधिकारी नरेंद्र ठाकुर और कंसलटेंट ने विवि को एक नॉन प्रॉफिट संस्था होने के नाते फीस के रूप में होने वाली आय से अधिक पैसा परीक्षा संचालन पर व्यय होने का तर्क रखा। 

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विवि की आय 20 करोड़, खर्चा 25 करोड़

No GST on fee for universities and colleges

पक्ष रखने के साथ ही विवि के इन अधिकारियों ने कहा कि अन्य सरकारी संस्थानों से सर्विस टैक्स वसूलने का मामला अभी विचाराधीन है, उन पर जो फैसला होगा, उसी के मुताबिक विश्वविद्यालय फीस पर सर्विस टैक्स देने या न देने पर निर्णय लेगा।

विवि कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान और वित्त अधिकारी नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विवि सिर्फ पांच सालों में संपत्ति से हुई आय पर करीब नौ लाख का टैक्स चुकाएगा।

विश्वविद्यालय को सालाना छात्रों से ली जाने वाली परीक्षा, रजिस्ट्रेशन, माइग्रेशन, एफिलिएशन सहित अन्य फीस और सेल्फ फाइनांसिंग कोर्स की फीस के रूप में करीब 20 करोड़ की आय होती है, जबकि 25 करोड़ तक विवि छात्रों पर व्यय करता है।

विवि की संपत्ति जैसे दुकानों आदि से होने वाली आय पर अप्रैल 2017 से लागू जीएसटी में करीब 18 फीसदी टैक्स अदा करने को विवि दुकानदारों के साथ दोबारा से नए सिरे से एमओयू साइन करेगा। किराये में ही जीएसटी को जोड़ दिया जाएगा, जिससे संपत्ति का किराया बढ़ना तय है।

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