अब 6 साल से कम उम्र के बच्चों को फर्स्ट क्लास में नहीं मिलेगा दाखिला
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प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों की फर्स्ट क्लास में अब छह साल से कम उम्र के बच्चों को दाखिला नहीं मिलेगा। प्रदेश सरकार ने अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजूकेशन सेंटर बिल 2016 तैयार कर लिया है।
बिल के तहत बिना पंजीकरण प्रदेश में खुले प्ले स्कूल और प्री नर्सरी स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी की गई है। नियमों की अनदेखी करने पर 25 हजार रुपये तक जुर्माना करने का प्रावधान भी किया गया है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बिल को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर आम जनता से 30 नवंबर तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित किए हैं। बिल को पूरी तरह से तैयार करने के बाद मंजूरी के लिए विधानसभा में रखा जाएगा।
प्ले स्कूलों के लिए भी नई गाइडलाइन
दुकानों की तर्ज पर गली-मोहल्लों में खुले प्ले स्कूलों पर नकेल कसने को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजूकेशन सेंटर बिल 2016 तैयार किया है। इस बिल के तहत सभी प्ले स्कूलों के पंजीकरण का अनिवार्य किया है।
प्ले स्कूल में बच्चों को दाखिला देने के लिए किसी भी प्रकार की लिखित और मौखिक परीक्षा पर रोक लगाई गई है। प्ले स्कूलों में पीटीए गठित करने का प्रावधान रखा गया है। पीटीए में 75 प्रतिशत अभिभावक (50 प्रतिशत माताएं) और 25 प्रतिशत शिक्षक शामिल होंगे।
पीटीए का गठन एक साल के लिए होगा। प्रति माह इसकी बैठक करनी पड़ेगी। बिल के तहत प्ले स्कूलों की फीस भी तय की जाएगी। सरकार के नियमों के अनुसार ही फीस को तय किया जाएगा। इसके अलावा प्ले स्कूलों में तैनात शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता को भी तय किया जाएगा।
प्ले स्कूल के लिए ये योग्यताएं अनिवार्य
जमा दो और नर्सरी टीचर ट्रेनिंग को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता रखा जाएगा। पर्याप्त इंडोर और आउट डोर स्पेस वालों को ही प्ले स्कूल खोलने की मंजूरी दी जाएगी। प्ले स्कूल में खिलौनों के साथ-साथ लर्निंग मैटीरियल भी रखना अनिवार्य किया गया है।
प्ले स्कूल में स्वच्छ पीने के पानी, साफ शौचालय और हैंड वॉश करने का पुख्ता बंदोबस्त करना होगा। पंजीकरण करवाने के लिए प्ले स्कूल प्रबंधन को विभाग के जिला परियोजना अधिकारी से संपर्क करना होगा।