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शिक्षाविदों ने बताया, इस कारण गिर रहा है उच्च शिक्षा का स्तर

Sun, 27 Nov 2016 08:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 27 Nov 2016 08:50 AM IST
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National Seminar on Higher Education Challenges at Hotel Holiday Home Shimla.

बेहतर उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों को पूरी स्वायत्तता मिलनी चाहिए। शिक्षा प्रणाली पर थोपी जा रहीं नई-नई शर्तों से शिक्षा की भावना कम हो रही है। शनिवार को राजधानी शिमला में ‘उच्च शिक्षा के समक्ष चुनौतियां’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में यह बातें सामने आईं।

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होटल ट्रिपल एच में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में रूसा सहित वोकेशनल शिक्षा और सीबीसीएस पर विस्तृत चर्चा की गई। 45 कॉलेज लेक्चरों ने इस दौरान अपने रिसर्च पेपर भी पढ़े। रूसा निदेशालय शिमला की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के पूर्व वीसी और ऑल इंडिया एसोसिएशन को इंडियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष प्रो. फुरकान कमर ने की।
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प्रो. कमर ने विश्व भर की उच्च शिक्षा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत में उच्च शिक्षा का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। चीन पहले नंबर पर है। उच्च शिक्षा के समक्ष आ रही चुनौतियों के समाधान के लिए उन्होंने पर्याप्त बजट और पर्याप्त फैकल्टी देने को कहा। प्रो. फुरकान ने कहा कि गुणवत्ता लाने से ही शिक्षा का स्तर सुधरेगा।
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उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने सीबीसीएस पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रूसा और सीबीसीएस दोनों ही अलग-अलग हैं। रूसा निदेशालय के निदेशक डा. अमरदेव ने बताया कि राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 45 रिसर्च पेपर पढ़े गए।

रूसा पद्धति को लेकर पेश आ रही समस्याओं पर मंथन किया गया। हिमाचल विश्वविद्यालय के प्रो. पीके आहलुवालिया ने रूसा को हिमाचल में लागू करने के समय पेश आई समस्याओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि हिमाचल ने सबसे पहले रूसा को प्रदेश में लागू कर कई राज्यों को राह दिखाई है।


शिक्षा पर भारी पड़ रहे बंधन
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के वीसी डा. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि शिक्षा प्रणाली पर कई बंधन भारी पड़ रहे हैं। बेहतर शिक्षा के लिए विश्वविद्यालयों को पूरी तरह से स्वायत्त करना चाहिए।

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