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HPPSC के अध्यक्ष बोले, इंटरव्यू को लेकर गलत धारणा न पालें अभ्यर्थी

Mon, 09 May 2016 11:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 09 May 2016 11:08 AM IST
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hppsc chairman ks tomar special interview
हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर। - फोटो : फाइल फोटो

हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष केएस तोमर ने कहा कि आमतौर पर अभ्यर्थी इस गलत धारणा का शिकार होते हैं कि उनके लिखित परीक्षा में अच्छे अंक होने के बावजूद उन्हें साक्षात्कारों में कम अंक दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वे स्पष्ट करना चाहते हैं कि साक्षात्कारों में अंक प्राप्ति के लिए उम्मीदवारों की अपनी योग्यता का प्रदर्शन ही मायने रखता है।

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असल में लिखित परीक्षा में किसके-कितने नंबर हैं, यह बात किसी को भी मालूम नहीं होती। इसे बिलकुल गोपनीय रखा जाता है। ऐसे में किसी से भेदभाव का सवाल ही नहीं होता। केएस तोमर ने ये बात ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में कही। केएस तोमर ने बताया कि विभिन्न परीक्षाओं जैसे कि एचएएस, एचजेएस, चिकित्सकों, अभियंताओं आदि की लिखित परीक्षाओं के साक्षात्कार में उम्मीदवारों की ओर से अर्जित अंकों में परस्पर कोई संबंध नहीं होता है।
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एचएएस परीक्षा के साक्षात्कारों में अभ्यर्थियों को अंकों का आवंटन केवल उनकी ओर से साक्षात्कार बोर्ड के अलग-अलग क्षेत्रों से पूछे गए प्रश्नों को आधार बनाकर और साक्षात्कार बोर्ड के सभी सदस्यों की आम सहमति के आधार पर किया जाता है। बोर्ड के सदस्यों में बहुत अनुभवी, कुशल प्रशासक और विद्वान लोग शामिल होते हैं।
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उन्होंने बताया कि एचएएस परीक्षा के साक्षात्कार बोर्ड की अध्यक्षता आयोग के अध्यक्ष की ओर से आमतौर पर की जाती है। शेष सदस्यों में आयोग के सदस्य, केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त या सेवारत सचिव स्तर के अधिकारी और प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव शामिल होते हैं।

उसी तरह से न्यायिक अधिकारियों के साक्षात्कार बोर्ड में आयोग के अध्यक्ष, उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश, आयोग के सदस्य और किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यायविद को शामिल किया जाता है। सिविल बोर्ड की तरह ही साक्षात्कार बोर्ड के सभी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित ज्ञान अर्जन और अनुभव से अभ्यर्थी की योग्यता का मूल्यांकन करते हैं।

यदि कोई भी अभ्यर्थी अपनी योग्यता का प्रदर्शन करने में असफल होता है तो निश्चित तौर पर साक्षात्कार बोर्ड उसको कम अंक अदा कर पाएगा। परीक्षा के नियमों में गोपनीयता की अनिवार्यता और मर्यादा को ध्यान में रखते हुए साक्षात्कार बोर्ड के किसी भी सदस्य के पास अभ्यर्थी के लिखित परीक्षा के अंकों की प्राप्ति विशेष रूप से प्रार्थी की अपनी योग्यता और प्रदर्शन क्षमता पर निर्भर करती है।

अब केबल एक वैकल्पिक विषय होगा- केएस तोमर ने कहा कि अभी तक एचएएस की परीक्षा में अभ्यर्थियों को दो वैकल्पिक विषय रखने होते थे। ये 300-300 अंकों यानी 600 अंकों के होते थे, मगर आगे से केवल एक ही वैकल्पिक विषय होगा।

यह भी महज 200 अंकों का होगा। दो वैकल्पिक विषयों से लिखित परीक्षा में अधिक अंक प्राप्ति की संभावनाएं देखी जाती रही हैं, मगर आगे से ऐसा नहीं होगा। नई व्यवस्था में दो वैकल्पिक विषयों के स्थान पर एक वैकल्पिक विषय निर्धारित किया गया है।

हिंदी में साक्षात्कार नहीं होने पर रोते तक थे अभ्यर्थी- केएस तोमर ने कहा कि जब से आयोग ने साक्षात्कार के लिए हिंदी भाषा का विकल्प सुझाया है, तब से 90 फीसदी उम्मीदवार हिंदी को ही अपना रहे हैं। अधिकतर अभ्यर्थी गांवों से ही होते हें। कई लड़के-लड़कियां तो हिंदी में साक्षात्कार देने के बाद यह कहकर भी चले गए कि उनका चयन हो या न हो, मगर उन्हें नई व्यवस्था का संतोष है।


उनके पास बेशक सवालों के जवाब होते थे। इन्हें पहले वे इसका मन ही मन हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद करते थे। फिर बाहर कहते थे। ऐसे में वे कई बार अंग्रेजी में ठीक से नहीं भी बोल पाते थे। उसके बाद रोने तक के लिए मजबूर हो जाते थे।

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