पहली बार सीसीटीवी की गिनरानी में होंगी बोर्ड परीक्षाएं
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राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड की 1846 परीक्षा केंद्रों में तीन मार्च से शुरू हो रही वार्षिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए कर्मचारियों का भारी अमला तैनात रहेगा। इतना ही नहीं सीसीटीवी कैमरों की भी नकल रोकने के लिए सहायता ली जा रही है। बोर्ड ने इस बार नकल रोकने के लिए 76 एसडीएम, 12 डिप्टी डायरेक्टर, स्कूल शिक्षा बोर्ड सहित करीब 250 फ्लाइंग स्क्वायड गठित किए हैं।
इसमें प्रत्येक टीम में करीब तीन सदस्य मौजूद रहेंगे। ये सभी उड़नदस्ते एसडीएम को रिपोर्ट करेंगे। एसडीएम ही परीक्षा केंद्रों में उड़नदस्तों को निरीक्षण के लिए भेजेगा। ताकि सभी परीक्षा केंद्रों में एक बराबर नजर रखी जा सके। इसके लिए बोर्ड ने प्रदेश भर के सभी एसडीएम को पत्र लिखकर सूचना भेज दी है।
जरूरत पड़ने पर मंगवाई जाएगी रिकॉर्डिंग
स्कूल शिक्षा बोर्ड ने लंबे समय से शत प्रतिशत परिणाम देने वाले 100 परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरा स्थापित करने के आदेश दिए हैं। साथ ही निजी स्कूलों में स्थापित परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरा स्थापित करना अनिवार्य है। जरूरत पड़ने पर इन केंद्रों से बोर्ड
सीसीटीवी कैमरा की रिकॉर्डिंग भी मंगवाएगा। बोर्ड नकल रोकने के लिए सरकारी स्कूलों में पायलट स्तर पर सीसीटीवी कैमरे लगवा रहा है। यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में सभी परीक्षा केंद्रों में सीसीटीवी कैमरा स्थापित किए जाएंगे।
अध्यक्ष स्कूल शिक्षा बोर्ड बलवीर तेगटा ने बताया कि वार्षिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए बोर्ड हर संभव प्रयास कर रहा है। किसी भी परीक्षा केंद्र में नकल करवाई जाती है, तो स्थानीय लोग इसकी सूचना बोर्ड को दे सकते हैं। इस पर कड़ी कार्यवाही होगी।
ग्रीष्मकालीन स्कूलों में टर्मिनल असेसमेंट नौ मार्च से
प्रदेश के 11 जिलों में ग्रीष्मकालीन छुट्टियों वाले स्कूलों में नौ मार्च से टर्मिनल असेसमेंट शुरू होगी। किन्नौर जिला को छोड़कर शेष सभी जिलों में पहली बार ओएमआर शीट्स में विषय वार परिणाम दर्ज किया जाएगा। पहली से चौथी और छठी-सातवीं कक्षा के विद्यार्थियों की असेसमेंट करने के लिए प्रश्नपत्र बीआरसीसी, र्बीईईओ और सीआरसीसी के माध्यम से स्कूलों में पहुंचाए जाएंगे।
टर्मिनल असेसमेंट से सामने आने वाली कमियों को सूचीबद्ध कर उसमें सुधार लाने के लिए विशेष योजनाएं बनाई जाएंगी। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय के मुताबिक पहली और दूसरी कक्षा के 48,500, तीसरी के 51,500, चौथी कक्षा के 52,000, छठी कक्षा के 57,600 और सातवीं कक्षा के 63,500 विद्यार्थियों की टर्मिनल असेसमेंट ली जाएगी। प्रदेश के 6909 प्राइमरी और 3071 अपर प्राइमरी स्कूलों में असेसमेंट होगी।
बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, लाहौल और स्पीति, मंडी, सोलन, सिरमौर और ऊना के स्कूलों में असेसमेंट होगी। टर्मिनल असेसमेंट की डेटशीट सर्व शिक्षा अभियान बीते माह जारी कर चुका है। बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से पहली से आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को टर्मिनल असेसमेंट के आधार पर फेल नहीं किया जाता है। सभी विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट किया जाता है।
क्लर्क की लिखित परीक्षा में कोताही पर बोर्ड सचिव से शिकायत
को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक क्लर्क भर्ती की लिखित परीक्षा में बरती गई कोताही को लेकर परीक्षार्थियों ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव को लिखित शिकायत कर दी है। साथ ही शिकायत की प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल, निदेशक शिक्षा विभाग और बैंक के प्रबंध निदेशक को भी प्रेषित कर दी है।
जिसमें मांग की गई है कि मामले पर सकारात्मक निर्णय लिए जाएं, ताकि भविष्य में परीक्षार्थियों और बोर्ड को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। 26 फरवरी को प्रदेश भर में को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक क्लर्कों के 113 पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।
परीक्षा खत्म होने पर परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस पर भड़के परीक्षार्थियों ने इसका खूब विरोध किया था। इस मामले को लेकर परीक्षार्थी अंकुर कौंडल ने घुमारवीं कन्या विद्यालय में कड़ा विरोध किया। लेकिन, कोई सकारात्मक कार्रवाई न होने के चलते उन्होंने इसकी लिखित शिकायत शिक्षा बोर्ड के सचिव से कर दी है।
शिकायत में बताया गया है कि परीक्षा खत्म होने के बाद उपस्थित स्टाफ ने प्रश्न पत्र परीक्षार्थियों को नहीं दिया और न ही रिकॉर्ड और उत्तर मिलान के लिए ओएमआर शीट की कोई कार्बन कॉपी संलग्न की गई थी। जिससे स्वाभाविक रूप से परीक्षार्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। प्रश्न पत्र पर नियम लिखे गए थे, जिसमें मात्र ओएमआर शीट जमा करवाने के निर्देश दिए गए थे।
उन्होंने पूछा है कि क्या परीक्षार्थियों को स्वमूल्यांकन के लिए प्रश्न पत्र उपलब्ध करवाना आवश्यक नहीं है? क्या ओएमआर शीट की प्रतिलिपि या कार्बन कॉपी उपलब्ध करवाना जरूरी नहीं था और बोर्ड को परीक्षार्थियों को इन प्रश्न पत्रों को वापस न करने से क्या फायदा या नुकसान है? उन्होंने कहा कि इससे पूर्व भी बोर्ड की ओर से आयोजित कई परीक्षाएं सुर्खियों में रही हैं। परीक्षार्थी अंकुर कौंडल ने मांग की है कि मामले पर कड़ा संज्ञान लिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी कोई परेशानी न पैदा हो।