विस चुनाव: परिवारवाद की राह पर भाजपा-कांग्रेस, ताल ठोकने को नए चेहरे तैयार
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कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल ही में राजनीति में वंशवाद को समस्या करार देते हुए इसे देश की सच्चाई बताया था। इसके बाद से देशभर में परिवारवाद पर बहस तेज हो गई है। लेकिन देश के कई राज्यों से इस मामले में हिमाचल कहीं आगे है।
सीएम वीरभद्र सिंह ने बेटे के लिए अपनी सीट छोड़ने का एलान करके वंशवाद की सियासत पर बहस को और गर्मा दिया है। इसी बीच, विधानसभा चुनाव के नजदीक आने पर सूबे के कई बड़े नेता अपनी अगली पीढ़ी को पहले से तैयार सियासी जमीन में स्थापित करने में जुट गए हैं।
प्रदेश में दोनों बड़े सियासी दलों भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता परिवारवाद की राह पक्की कर रहे हैं। चुनाव में परिवार की टिकट पक्की करने के लिए इन नेताओं ने कदमताल शुरू कर दी है।
चूंकि भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट आवंटन को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। लिहाजा, दिल्ली दरबार तक गोटियां फिट की जा रही हैं।
अपनों को प्रमोट करने के अपने-अपने तरीके
प्रदेश में वंशवाद की सियासत कांग्रेस और भाजपा दोनों में होती रही है। दोनों दलों के कई बड़े नेताओं ने सियासत में परिवार को आगे बढ़ाया है। बेटे-बेटियों के बाद तीसरी पीढ़ी भी सियासी दंगल में ताल ठोंक रही है। वीरभद्र सिंह से पहले नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल भी बेटे अनुराग ठाकुर को राजनीति में लॉन्च कर चुके हैं
परिवहन मंत्री जीएस बाली के बेटे रघुवीर बाली और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर भी सियासी पारी खेलने के लिए तैयार हैं। पंडित सुखराम के बेटे कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा के बाद उनका पोता आश्रय शर्मा भी चुनाव मैदान में कूदने को बेताब हैं। चुनावी बिसात पर अपनों की गोटियां फिट करने की ऐसी कसरत कई हलकों से तेज हो गई है।
अपनी नई पीढ़ी को आगे लाने की जुगत में स्थापित नेता अलग-अलग तरीकों से अपनों को प्रमोट कर रहे हैं। कोई पार्टी में अच्छा ओहदा दिलाकर सियासी सफलता की सीढ़ी तैयार कर रहा है तो कोई उद्घाटन पट्टी में नाम लिखाकर प्रोजेक्ट करने में लगा है। हिमाचल प्रदेश में राजधानी शिमला से लेकर ऐसी नजीर अन्य हलकों में भी बनकर सामने आ रही है।
धूमल परिवार
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र अनुराग ठाकुर लगातार तीन बाद लोकसभा सदस्य निर्वाचित हुए हैं। पहली बार अनुराग ठाकुर ने मई 2008 में हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से लोकसभा उपचुनाव में जीत दर्ज की थी।
लोकसभा उपचुनाव के समय उनके पिता प्रेम कुमार धूमल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। इसके बाद उन्होंने 2009 और 2014 में लोकसभा चुनाव जीता। वर्ष 2011 में अनुराग ठाकुर को युवा सांसद का अवार्ड भी मिल चुका है।
धूमल के छोटे पुत्र अरुण धूमल वर्तमान में एक व्यवसायी हैं और आए दिन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ नए-नए खुलासे करते रहते हैं।
हालांकि अरुण धूमल एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं हैं। अरुण धूमल ने कहा कि अभी तक चुनाव लड़ने के बारे में उनका कोई विचार नहीं है। वह केवल पार्टी की सेवा के लिए कार्य करते हैं और भविष्य में भी करेंगे।
पिता की विरासत को संभालने वालों में कांग्रेस दिग्गज एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्व. यशपाल परमार के बेटे कुश परमार, सत महाजन के बेटे विधायक अजय महाजन, पूर्व मंत्री पंडित सुखराम के बेटे और कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा, पूर्व सांसद चंद्र कुमार
के बेटे नीरज भारती, पूर्व मंत्री स्व. पंडित संतराम के बेटे और कैबिनेट मंत्री सुधीर शर्मा, पूर्व सीएम ठाकुर रामलाल के पोते रोहित ठाकुर, पूर्व सीपीएस प्रेम कुमार के बेटे और सीपीएस विनय कुमार, पूर्व विधायक मिल्खी राम गोमा के बेटे यादवेंद्र गोमा और पूर्व सीपीएस लज्जा राम के बेटे राम कुमार आदि शामिल हैं।
भाजपा में भी परिवारवाद
प्रदेश में भाजपा के कई नेता अपने बच्चों को राजनीति में स्थापित करवा चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे सांसद
अनुराग ठाकुर, पूर्व मंत्री कुंज लाल ठाकुर के बेटे एवं मनाली से विधायक गोविंद सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री स्व. जगदेव ठाकुर के बेटे
विधायक नरेंद्र सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री स्व. आईडी धीमान के बेटे एवं विधायक अनिल धीमान जैसे कई नेता सियासी पारी शुरू कर चुके हैं।