फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   himachal assembly election bjp focus on kangra district

हिमाचल विस चुनाव: इस सियासी किले पर टिकी हैं भाजपा की नजरें

Fri, 13 Oct 2017 07:15 PM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Oct 2017 07:15 PM IST
विज्ञापन
himachal assembly election bjp focus on kangra district

हिमाचल प्रदेश में सर्वाधिक विधानसभा सीटों वाले जिले कांगड़ा में सेंधमारी के लिए भाजपा ने किलेबंदी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की कांगड़ा में भरी हुंकार इसी रणनीति का हिस्सा है। चार माह में शाह दूसरी बार इस जिले में पहुंचे हैं। 

विज्ञापन


भाजपा के रणनीतिकार जानते हैं कि 15 सीटों वाला कांगड़ा लोअर हिमाचल का सियासी दुर्ग है। वर्ष 2012 में यहीं से 10 सीटें जीत कांग्रेस सत्ता में पहुंची है। उधर, अंदरूनी खींचतान से जूझ रही कांग्रेस को एक करने के लिए कुछ दिन पूर्व प्रदेश प्रभारी सुशील कुमार शिंदे जिले में प्रवास कर चुके हैं। 
विज्ञापन


कांग्रेस का मिशन रिपीट तो भाजपा के मिशन 50 प्लस की सफलता इसी जिले पर टिकी है। अमित शाह ने कांगड़ा में चुनावी रैली कर साफ कर दिया है कि पार्टी कांगड़ा में वोट बैंक मजबूत करना चाहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पिछले चुनाव में ये थी भाजपा की हार की वजह

himachal assembly election bjp focus on kangra district

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल खेमे के बीच सियासी खींचतान का खामियाजा पार्टी को हर चुनाव में होता है। आयु सीमा के बैरियर के चलते भले पूर्व सीएम शांता कुमार सीएम की दौड़ में नहीं हैं, लेकिन भाजपा की चुनावी रणनीति में उनकी अहम भूमिका तय कर खेमेबाजी को कम करने की कोशिश की है। 

खेमेबाजी के बाद कांगड़ा में भाजपा के लिए दूसरी बड़ी चुनौती प्रत्याशियों के चयन की है। पिछले चुनाव में हार की बड़ी वजह टिकटों का गलत चयन माना जाता है। इस बार पार्टी जिले की आधी सीटों पर युवा चेहरों को मौका दे सकती है। प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय का कांगड़ा पर फोकस है।

अंदरूनी कलह कांग्रेस की चिंता

himachal assembly election bjp focus on kangra district

कांग्रेस के लिए कांगड़ा में आंतरिक कलह सबसे बड़ी चिंता है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का जीएस बाली के साथ कुछ खास तालमेल नहीं है। मेजर विजय सिंह मनकोटिया भी वीरभद्र के विरोध में हल्ला बोल चुके हैं।

कैबिनेट मंत्री सुधीर शर्मा और सुजान सिंह पठानिया को वीरभद्र खेमे का माना जाता है, लेकिन दोनों प्रदेश कांग्रेस के साथ नहीं माने जाते हैं।

पीसीसी के कार्यक्रमों में इनकी सक्रियता नहीं रहती है। कांगड़ा से एक निर्दलीय विधायक मनोहर धीमान भाजपा में जा चुका है, विधायक पवन काजल पर भी डोरे जा रहे हैं।

कांग्रेस विधायक यादवेंद्र गोमा के चचेरे भाई भाजपा का दामन खाम चुके हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के गद्दी समुदाय को लेकर दिया बयान से भड़की आग को भाजपा ठंडा नहीं होने दे रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed