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पहल! अब बस्ते का बोझ लेकर स्कूल नहीं आएंगे बच्चे

Mon, 17 Apr 2017 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, टिहरा (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, टिहरा (मंडी) Updated Mon, 17 Apr 2017 10:17 AM IST
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govt school Tihra (Mandi) initiative for students

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में स्कूली बच्चों का बचपन बस्तों के बोझ तले दब रहा है। स्कूल चाहे निजी हो या सरकारी, बच्चों के कंधों पर बस्तों का यह बोझ हर जगह है। बच्चों के कंधों से बस्ते का बोझ उतारने को मंडी जिले के सीनियर सेकेंडरी स्कूल टिहरा में एक सराहनीय पहल की जा रही है। 

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यहां के बच्चे अब किताबों से भरा बैग लेकर स्कूल नहीं आएंगे। उन्हें सिर्फ नोट बुक्स ही लानी होंगी। बच्चे किताबें घर पर ही रखकर आएंगे। पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को क्लास रूम में डेस्क पर ही पढ़ने के लिए किताबें मुहैया करवाई जाएंगी। इसकी व्यवस्था स्कूल से पास आउट होने वाले विद्यार्थी ही करेंगे। 
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शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समिति ने निर्णय लिया है कि आठवीं कक्षा तक पासआउट विद्यार्थी किताबों को रद्दी में बेचने की बजाय कक्षा में आने वाले बच्चों को मुहैया करवाएंगे। इससे नई कक्षा में आने वाले विद्यार्थियों को स्कूल में ही पढ़ने के लिए किताबें मिलेंगी।
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वे अपनी नई किताबों से घर में पढ़ाई कर सकेंगे। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान सुनील कुमार अत्री ने यह सुझाव स्कूल के समक्ष रखा है। इसे समिति सदस्यों, प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने सराहा है। इस फैसले को इसी सत्र से लागू करने का निर्णय लिया है। 

सभी ने माना एसएमसी प्रधान का सुझाव: प्रिंसिपल
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टिहरा के प्रधानाचार्य प्रीतम चंद ने कहा कि एसएमसी प्रधान के सुझाव को सभी सदस्यों और शिक्षकों ने सराहा है। लगभग सभी अभिभावकों ने इस निर्णय को लागू करने में हामी भरी है।


स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे कक्षा पास करने के बाद किताबों को बेचने की बजाय स्कूल में नई कक्षा में आने वाले बच्चों को देंगे। इससे हर दिन बच्चों को किताबों का भार नहीं ढोना पड़ेेगा। पहली से आठवीं कक्षा तक यह व्यवस्था की गई है।

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